होम जिन चीजों का कभी समर्थन करती थी कांग्रेस आज उनका विरोध करने का दांव पड़ रहा उल्टा
जिन चीजों का कभी समर्थन करती थी कांग्रेस आज उनका विरोध करने का दांव पड़ रहा उल्टा
नये कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 29 वां दिन है. लेकिन अभी भी इस मुद्दे पर समाधान कम और घमासान ज्यादा दिख रहा है. आज किसान मजदूर संघ, बागपत से जुड़े 60 किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिला और सरकार को नये कृषि कानून को लिखित समर्थन दिया. कृषि मंत्रालय से बाहर निकलने के बाद इन किसान नेताओं ने मोदी सरकार के समर्थन में नारे भी लगाए.
आज सरकार की ओर से किसानों को एक और चिट्ठी भी लिखी गई. ये चिट्ठी केंद्र सरकार की ओर से संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने लिखी और किसानों से इस बात की गुजारिश की कि वो बातचीत के लिए आगे आएं और सरकार को तारीख बताएं. सरकार किसानों की हर मांग पर चर्चा करने के लिए तैयार है. सरकार इस मुद्दे का तर्कपूर्ण समाधान निकालना चाहती है. किसानों के नाम इस चिट्ठी में ये भी जिक्र है कि सरकार MSP पर लिखित आश्वासन देने को तैयार है.
लेकिन सरकार की ये चिट्ठी आंदोलन कर रहे किसानों को बिल्कुल नहीं भाई. किसान नेता कह रहे हैं कि उन्हें कानून वापसी से कम स्वीकार ही नहीं है. नये कृषि कानून को लेकर आज कांग्रेस ने राजनीति तेज कर दी. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ही आज सड़कों पर उतरे और सुपरएक्टिव मोड में दिखे.
राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के सभी सांसद दिल्ली में विजय चौक से पैदल मार्च करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने जा रहे थे. लेकिन धारा 144 के कारण दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को रोक दिया. सिर्फ राहुल गांधी और दो नेताओं को राष्ट्रपति भवन जाने की इजाजत मिली. राहुल का दावा है कि राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्होंने दो करोड़ लोगों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंपा. राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला.
आपको बता दें कि नये कृषि कानून के खिलाफ कांग्रेस का आज सुबह साढ़े 11 बजे राष्ट्रपति भवन तक मार्च का कार्यक्रम था, लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बाद राहुल और प्रियंका गांधी ने करीब आधे घंटे तक कांग्रेस मुख्यालय के लॉन में रणनीति बनाई. इस बात पर माथापच्ची चलती रही कि मार्च कैसे निकाला जाए.
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