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गोवा में बीफ़ मुहैया कराने को लेकर बीजेपी सरकार परेशान
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि वह व्यापारियों को अपने राज्य में मवेशी लाने और हत्या की इजाज़त देंगे. उनके इस बयान से लोग हैरान हैं.
इस बयान पर कुछ लोगों का मानना है कि सभी को अपनी संस्कृति के आधार पर खाना चुनने की छूट होनी चाहिए. तो वहीं एक वर्ग जो गाय की पूजा करता है वह मानता है कि सावंत ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और उनका ''गाय की पूजनीय मानने का दावा'' झूठा है.
मुख्यमंत्री का ये बयान तब आया है जब राज्य में महाराष्ट्र और कर्नाटक के कारण बीफ़ (भैंस का मांस) की उपलब्धता को लेकर संकट पैदा हो गया है. दरअसल चार साल पहले महाराष्ट्र ने बीफ़ और मवेशियों को काटे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था और अब कर्नाटक में भी गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया है और बीफ़ या उससे तैयार किए गए उत्पाद को राज्य के भीतर और बाहर ले जाने पर परमिट से जुड़ा अध्यादेश राज्य सरकार लाने वाली है.
अब कर्नाटक में भी गौहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया है और बीफ़ या उससे तैयार किए गए उत्पाद को राज्य के भीतर और बाहर ले जाने पर परमिट से जुड़ा अध्यादेश राज्य सरकार लाने वाली है.
सावंत का ये बयान उनके उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह ख़ुद ''गाय की पूजा'' करते हैं लेकिन उनकी कुछ मजबूरियां हैं.
गोवा के गौरक्षक गौवंश दक्ष अभियान से जुड़े हनुमंत परब ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''अगर वह सच्चे गौ भक्त हैं तो ये उनके लिए और बीजेपी के लिए बेहद शर्मनाक है कि वह राज्य में बीफ़ की सप्लाई का प्रबंधन कर रहे हैं. वह सत्ता के लिए अपने उसूल भूल गए हैं.''
लेकिन वह क्या मजबूरी है जिसके कारण गोवा के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के राष्ट्रीय एजेंडा के ख़िलाफ़ जा रहे हैं.
प्रमोद सावंत ने ख़ुद इसका जवाब देते हुए कहा था, ''राज्य का मुख्यमंत्री होने के नाते मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं राज्य के अल्पसंख्यकों का भी ख़याल रखूं. गोवा में 30 फ़ीसदी ऐसे अल्पसंख्यक हैं जो बीफ़ खाते हैं.''
राज्य के राजस्व मंत्री जेनिफ़र मॉन्ज़ेरेट ने बीबीसी से कहा, ''मुख्यमंत्री ने ये बात एक संदर्भ के साथ कही है. वह आम लोगों के बीच लोकप्रिय चेहरा हैं. दक्षिणी गोवा में ज़्यादातर कैथोलिक ईसाई रहते हैं. ये अल्पसंख्यकों, ईसाई या मुस्लिमों की बात नहीं है, ये गोवा की जीवनशैली का हिस्सा है.''
गोवा की संस्कृति को समझने वाले और एक रेस्टोरेंट के मालिक अर्मांन्दो गोंजाल्विस कहते हैं, ''साल 2012 में मनोहर पार्रिकर को लोगों ने उनकी सेक्युलर छवि के कारण चुना था. हर समुदाय के लोग पार्रिकर के लिए एकजुट होकर वोट देते थे. गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड है, गोवा के पास ऐसी कई चीज़ें हैं जिससे पूरा देश सीख सकता है. दूसरे राज्यों की चीज़ें गोवा में घुसाने से बेहतर है कि केंद्र में बैठा बीजेपी का नेतृत्व गोवा से सीख ले.''
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