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Alert Star Digital Team Dec 1, 2020 09:31 PM

जीतकर भी शिवराज कमजोर, भाजपा तलाश रही है भविष्य़ का चेहरा

जीतकर भी शिवराज कमजोर, भाजपा तलाश रही है भविष्य़ का चेहरा

जीतकर भी शिवराज कमजोर, भाजपा तलाश रही है भविष्य़ का चेहरा

मध्य प्रदेश में हाल में हुए उपचुनाव से पहले यह अनुमान लगाये जा रहे थे कि यदि चुनाव में भाजपा की जीत होती है तो आगे राज्य में शिवराज और सिंधिया की जोड़ी भाजपा की धुरी रहेंगे। मध्य प्रदेश की सियासत की दिशा भी इन्हीं दोनों दिग्गजों के अनुसार तय होगी, किन्तु चुनाव बाद स्थिति बिल्कुल उलट लग रही है। सत्ता और पार्टी दोनों की चाबी संगठन ने अपने हाथ में ले रखी है।

कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को हटाने के बाद जब दोबार भाजपा की सरकार बनी उसके बाद से ही संगठन ने कमान अपने हाथ में ले रखी है। शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री तो बना दिया किन्तु मंत्रिमंडल गठन करने को लेकर उनके हाथ बधे रहे। उपचुनावों को देखते हुए सिंधिया खेमें के लोगों को मंत्री जरूर बनाया गया लेकिन भाजपा से संगठन की पसंद के लोगों को ही जगह मिली।

उपचुनावों की महत्ता को देखते हुए संगठन ने शिवराज को सत्ता संचालन को लेकर पूरी छूट दी। सरकार में उसकी ओर से किसी भी तरह का हस्ताक्षेप नहीं किया गया। यह अनुमान लगाये जा रहे थे कि उपचुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में आने के बाद शिवराज और सिंधिया दोनों और मजबूत हो जायेंगे लेकिन हकीकत बिल्कुल इसके उलट दिख रही है।

दो मंत्रियों द्वारा चुनाव पूर्व त्यागपत्र देने तथा कुछ मंत्रियों के चुनाव हारने के बाद मंत्रिमंडल में पांच जगह खाली हुई है। इसमें ये सभी पद सिंधिया खेमे के मंत्रियों के थे। सिंधिया की ओर से मांग है कि ये सभी पद उनके समर्थन वाले विधायकों को वापस दिये जाये तथा दो हारने वाले मंत्री इमरती देवी और गिरिराज दंडोतिया को निगम -मंडल में नियुक्ति दी जाये। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इस बात लेकर सहमत थे किन्तु संगठन ने साफ इंकार कर दिया है। मंत्रिमंडल विस्तार में त्याग पत्र देने वाले गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट को ही स्थान मिलने की संभावना है। इसके अलावा हारने वालों को निगम-मंडल में नियुक्तियों की सिंधिया की मांग को भी संगठन मानने को तैयार नहीं है। भाजपा संगठन ने संकेत दिया है कि हारने वाले मंत्रियों की जगह भाजपा के मंत्री बनाये जायेंगे। यह नाम भी भाजपा संगठन ही तय करेगा जिसमें नये चेहरों को शामिल किया जायेगा। लंबे समय तक मंत्री रह चुके लोगों को फिर मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया जायेगा। इसके अलावा प्रदेश के निगम मंडलों में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां होनी है। इसमें भी केवल और केवल संगठन की चलने के आसार है। संगठन ने कहा है कि जिन लोगों ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम किया है उन्हीं को इनमें स्थान दिया जायेगा। यहां भी वही फार्मूला लागू होगा कि जिन लोगों को पहले इस तरह की नियुक्तियां मिल चुकी है, उनको मौका नहीं दिया जायेगा।

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