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बिहार चुनाव 2020: BJP के चुनावी अंकगणित में सवर्णों के साथ ओबीसी
बिहार में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 46 उम्मीदवारों की भाजपा की सूची पर नजर डाली जाए तो इसमें बड़े पैमाने पर ओबीसी और दलित वोट बैंक में सेंध लगाने और उच्च जाति के समर्थन को बरकरार रखने की रणनीति अपनाई गई है। राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में सदन की 243 सीटों में से 94 सीटों पर तीन नवंबर को मतदान होगा।
सीवान और अमनौर में निवर्तमान विधायक टिकट से रहे वंचित
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के साथ सीट बंटवारे की व्यवस्था के तहत भाजपा को इनमें से आधी से अधिक सीटें मिली है। भाजपा ने दूसरे चरण के चुनाव वाली सीटों में से 20 पर पिछले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी जिनमें से चार सीटों सुगौली, चनपटिया, सीवान और अमनौर में इसके निवर्तमान विधायक इस बार टिकट से वंचित रह गए हैं। सुगौली सीट जदयू के खाते में चली गयी है और भाजपा ने शेष तीन सीटों पर इस बार नए चेहरों पर भरोसा किया है।
भाजपा की सूची में अन्य ओबीसी समूहों के उम्मीदवार शामिल
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए भाजपा द्वारा घोषित 46 उम्मीदवारों में से लगभग आधे उम्मीदवार उच्च जातियों राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण, कायस्थ और वैश्य से आते हैं जो राज्य में पार्टी का मुख्य आधार हैं। भाजपा ने यादव समुदाय से आठ उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिसके जरिए पार्टी ने राज्य में सबसे बड़े ओबीसी समूह में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। सभी 115 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने वाली जदयू ने भी पर्याप्त संख्या में यादव समुदाय के लोगों को मैदान में उतारा है। भाजपा की सूची में अन्य ओबीसी समूहों के उम्मीदवार भी शामिल हैं तथा सात आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में कई दलित उम्मीदवार पार्टी के लिए वोट मांगते नजर आएंगे।
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