होम सैनिकों को नॉन बुलेट प्रूफ वाहनों में भेजने पर राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा
सैनिकों को नॉन बुलेट प्रूफ वाहनों में भेजने पर राहुल गांधी ने केंद्र को घेरा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के चक्कर रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विमान खरीदने और सैनिकों के लिए नॉन बुलेट प्रूफ वाहनों के प्रावधान पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने हिंदी में ट्वीट कर कहा, 'हमारे जवानों को नॉन बुलेट प्रूफ ट्रकों में शहीद होने भेजा जा रहा है और प्रधानमंत्री के लिए 8,400 करोड़ के जहाज! क्या यह न्याय है?' इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें नॉन बुलेट प्रूफ वाहनों में जा रहे सैनिकों को बातचीत करते सुना जा सकता है। इसमें सैनिक उन्हें नॉन बुलेट प्रूफ वाहनों में ले जाए जाने पर आपत्ति जता रहे हैं, जबकि उनके वरिष्ठ बुलेट प्रूफ वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
खुद घिर गए गए थे राहुल गांधी
पीएम मोदी को घेरने के चक्कर में अक्सर खुद ही सवालों के घेरे में आने वाले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ऐसी ही कोशिश करके घिर गए थे। नरेंद्र मोदी ने हाल में विंड टरबाइन के जरिये पेयजल और ऑक्सीजन भी बनाने का सुझाव दिया था, जिसका राहुल गांधी ने माखौल उड़ाया था। इसके बाद न सिर्फ भाजपा ने बल्कि वैज्ञानिकों की संस्था काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च (सीएसआइआर) ने भी राहुल गांधी के ज्ञान पर संदेह जताया था।
सीएसआइआर ने दिया था जवाब
सीएसआइआर ने ट्वीट कर कहा था, 'वातावरण से पानी बनाने का तरीका सुव्यवस्थित है और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हवा से पानी निकालने का काम जारी है। सीएसआइआर ने मैत्री एक्वाटेक के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और संयुक्त पेटेंट हासिल किया है। रेलवे स्टेशनों पर मेघदूत एडब्लूजी लगे हैं।' सीएसआइआर ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री कार्यालय, नरेंद्र मोदी और सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार को भी टैग किया है। मालूम हो कि मेघदूत एडब्लूजी के जरिये हवा में मौजूद नमी को सोखकर पेयजल बनाया जाता है। सीएसआइआर ने हवा से पानी निकालने का तरीका समझाते हुए एक ग्राफिक्स भी साझा किया।
राहुल ने कहा था
दरअसल, राहुल ने ट्वीट कर कहा था, 'असली खतरा यह नहीं है कि हमारे प्रधानमंत्री समझते नहीं है। सच तो यह है कि उनके आसपास के किसी शख्स में यह कहने की हिम्मत नहीं है।' इसके साथ उन्होंने प्रधानमंत्री का एक विंड एनर्जी कंपनी के सीईओ के साथ बातचीत का वीडियो भी पोस्ट किया था। इसमें प्रधानमंत्री को यह सुझाव देते हुए सुना जा सकता है कि विंड टरबाइन का इस्तेमाल सिर्फ ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए ही नहीं बल्कि सघन वायु से ऑक्सीजन और स्वच्छ पेयजल उत्पादित करने के लिए भी किया जाए।
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