होम गठिया के ज्यादा असरदार इलाज की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े वैज्ञानिक

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jul 7, 2020 07:21 PM

गठिया के ज्यादा असरदार इलाज की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े वैज्ञानिक

गठिया के ज्यादा असरदार इलाज की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े वैज्ञानिक

गठिया के ज्यादा असरदार इलाज की दिशा में एक कदम और आगे बढ़े वैज्ञानिक

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के अनुसंधानकर्ताओं ने सूक्ष्म कण वाला एक फॉर्म्यूलेशन विकसित किया है जो गठिया (Osteoarthritis) के इलाज में मदद करता है. IISc की एक विज्ञप्ति में बताया गया कि अनुसंधानकर्ताओं ने एफडीए स्वीकृत जैविक पदार्थ पीएलजीए (लैक्टिक को-ग्लाइकोलिक एसिड) से बने पॉलिमर मैट्रिक्स को,‍ शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा को कम करने वाली दवा रेपामिसिन को कैप्सूल के रूप में ढालने के लिए डिजाइन किया है.

ये है रिसर्च
इसमें बताया गया कि प्रयोगशाला में बनाई गई कोशिकाओं के साथ ही चूहों के मॉडल पर किए गए प्रारंभिक अध्ययन में सुखद परिणाम मिले जो लगातार दवा के स्राव के चलते सूजन कम करने और उपास्थि (कार्टिलेज) के ठीक होने का संकेत देते हैं. IISc के सेंटर फॉर बायोसिस्टम्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में पीएचडी की छात्रा कामिनी एन धनबालन ने कहा, 'कोशिकाओं के अध्ययन में, रेपामिसिन युक्त पीएलजीए सूक्ष्म कण 21 दिन तक दवा छोड़ सकते हैं और जानवरों पर किए अध्ययन में इस दवा ने चूहों के जोड़ों में सूक्ष्म कण डाले जाने के बाद 30 दिन तक असर दिखाया.'

बढ़ती उम्र की बीमारी
दरअसल गठिया उपास्थियों की टूट-फूट की बीमारी है जो तनाव या उम्र बढ़ने के कारण होता है. उपास्थियां वे कोमल उत्तक होते हैं जो हड्डियों के जोड़ को बचा कर रखते हैं. मौजूदा इलाज पद्धति बीमारी को निशाना बनाने की बजाय दर्द और सूजन को कम करने पर केंद्रित है. अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और बीएसएसई में सहायक प्राध्यापक रचित अग्रवाल ने कहा कि इस संबंध में विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है.

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