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कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन से निपटने के लिए तैयार रहे भारत
भारत को कोरोना के सामुदायिक विस्तार से निपटने के लिए कमर कस लेनी चाहिए। देश के लिए यह अभी भी बहुत खतरे की बात है। यह चेतावनी देश के जाने माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने लॉकडाउन में और ढिलाई दिए जाने पर कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका को ध्यान में रखते हुए दी है।
संक्रमण के मामलों की हो सकती है पूरी पड़ताल
कुछ विशेषज्ञों की राय में देश में कोरोना के सामुदायिक विस्तार का दौर चलने की बात पर टिप्पणी करते हुए पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि यह परिभाषा का मामला है। अगर लोग किसी की यात्रा का इतिहास या लोगों के दूसरों से संपर्क में आने का ब्योरा नहीं जानते तो ऐसा ही कहेंगे। कुछ ऐसे मामले भी हो सकते हैं। लेकिन अभी भी ज्यादातर मामले विदेश से या दूसरी जगहों से आए लोगों के संपर्क में आने वालों तक सीमित हैं।
ऐसे मामलों में संक्रमण के कारण की पूरी पड़ताल की जा सकती है। यही वजह है कि हम अभी सामुदायिक विस्तार की बात कहने से बच रहे हैं। यह सिर्फ भाषा और परिभाषा की बात है। इस पर बहस की जरूरत नहीं है। डा. रेड्डी भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।
भारत को हर तरह से तैयार रहना चाहिए
उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस-जिस देश में कोरोना का हमला हुआ है, वहां सामुदायिक विस्तार भी जरूर देखने को मिला है। ऐसे में भारत को हर तरह से तैयार रहना चाहिए। उसे मौजूदा दौर में ही सामुदायिक विस्तार की बात मानते हुए अपनी तैयारी करने और उन्हें अंजाम देने का काम करना चाहिए। उसे सुरक्षा के सारे कदम उठाने चाहिए।
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