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इंतजार, तय समय से 4 दिन बाद केरल में मानसून
मध्य अप्रैल से लेकर मई तक उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में धूल भरी आंधियां आती और उसके साथ कुछ बारिश हो जाती है जिससे लोगों को राहत मिलती है। लेकिन उसे मानसूनी बारिश नहीं कहते हैं। वैसे तो मानसून सबसे पहले अंडमान निकोबार में दस्तक दे देता है। लेकिन मुख्य भूमि पर यह केरल के तट से टकराता है। ऐसे में सवाल यह है कि इस दफा मानसून केरल के तट पर कब दस्तक देगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष भारत में मौसम सामान्य रहेगा। लेकिन मानसून इस दफा तय समय से चार दिन बाद केरल में दस्तक देगा।
मौसम विभाग के मुताबिक अब केरल में मानसून पांच जून तक आएगा।इस वर्ष केरल में मानसून सामान्य तारीख के मुकाबले कुछ विलंब से आएगा। राज्य में मानसून पांच जून तक आ सकता है।केरल में मानसून आने के साथ देश में चार महीने के बरसात मौसम की आधिकारिक शुरुआत हो जाती है। जून से सितंबर तक का मौसम बरसात का माना जाता है। आमतौर पर केरल में हर साल मानसून एक जून को आता है।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान के कारण अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में मानसून अपनी सामान्य तारीख 22 मई से छह दिन पहले 16 मई तक आ सकता है। 2018 में अंडमान-निकोबार में मानसून अपनी तय तारीख से दो दिन पहले 18 मई को आ गया था लेकिन गति धीमी पड़ने से केरल में यह आठ जून को पहुंचा था और पूरे देश में मानसून की आमद 19 जुलाई को हुई थी।
बता दें कि देश में 75 फीसदी तक बारिश जून से सितंबर में दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है यह देश में न केवल खेती के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि जलाशयों में पानी भरने के साथ ही अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है जो मुख्य तौर पर कृषि आधारित है।वहीं देश में उत्तरपूर्वी मानसून भी बारिश लेकर आता है। उत्तरपूर्वी मानसून से अक्टूबर से दिसंबर के बीच तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश के हिस्सों में बारिश होती है।इस साल भारतीय मौसम विभाग ने 1960 से 2019 के आंकड़ों के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून के सक्रिय होने और जाने की तारीखों को संशोधित किया है।
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