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कोरोना कहर के बीच अच्छी खबर, भारत में एक प्रतिशत मरीज भी वेंटिलेटर पर नहीं
कोरोना के मरीजों की बढ़ती तादाद इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे राष्ट्रों में भले ही वेंटिलेटर की जरूरतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन हिंदुस्तान में स्थिति नियंत्रण में है. देश में कोरोना के एक प्रतिशत मरीज भी वेंटिलेटर पर नहीं हैं. आपको बता दें कि सोमवार प्रातः काल चार हजार के पार पहुंच गई. वहीं, 100 से अधिक लोगों की संक्रमण के चलते मृत्यु हो गई है.
भारत में कोरोना पीड़ितों की तादाद तीन हजार का आंकड़ा पार कर गई है, लेकिन 17 राज्यों के सिर्फ दो प्रतिशत से थोड़े ज्यादा 73 मरीज गंभीर स्थिति के कारण आईसीयू में हैं व करीब 32 मरीज वेंटिलेटर पर हैं. अमेरिका, स्पेन व इटली में आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 9 से 12 प्रतिशत है व तीन से सात प्रतिशत तक वेंटिलेटर पर मृत्यु से लड़ रहे हैं. आईसीएमआर की हालिया रिपोर्ट में बोला गया था कि हिंदुस्तान में जो 60 मौतें कोरोना से हुई थी, उसमें से महज आठ वेंटिलेटर पर थे.
एम्स के पूर्व निदेशक एमसी मिश्रा ने बोला कि हिंदुस्तान में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या कम होने को लेकर कई अवधारणाएं हैं, लेकिन इन पर मुहर लगना बाकी है. मिश्रा के मुताबिक, कोरोना का जो वायरस है, वह आरएनए वायरस है. हिंदुस्तान में डेंगू का बेहद प्रसार रहा है. जीका, मलेरिया से बहुत ज्यादा लोग कभी न कभी चपेट में आए हैं व इनकी दवाओं के कारण हमारे अंदर ऐसे एंटीबॉडी हैं, जो इस वायरस का बेहतर मुकाबला कर पाने में सक्षम हैं. बीसीजी टीकाकरण के कारण भी हिंदुस्तानियों की प्रतिरोधक क्षमता दूसरे राष्ट्रों की तुलना में अच्छी है. हिंदुस्तान में बुजुर्गों की संख्या स्पेन, इटली या अमेरिका जैसे राष्ट्रों के मुकाबले कम हैं, इस कारण भी हिंदुस्तान में गंभीर स्थिति वाले मरीजों की संख्या कम है.
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