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वन्यजीवों और आवास का संरक्षण भारत के सांस्कृतिक लोकाचार का हिस्सा: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वन्यजीवों और आवास का संरक्षण भारत के सांस्कृतिक लोकाचार का हिस्सा है, जो करुणा और सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करता है। पीएम मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में जंगली जानवरों के प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर एक सम्मेलन को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'लंबे समय से, वन्य जीवन और निवास स्थान का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक नैतिकता का हिस्सा रहा है, जो करुणा और सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करता है।'
उन्होंने कहा, 'हमारे वेदों में जानवरों के संरक्षण की बात की गई है। सम्राट अशोक ने वनों के विनाश और जानवरों की हत्या को रोकने के लिए बहुत जोर दिया।' पीएम मोदी ने भारत को विविध पारिस्थितिक आवासों से समृद्ध और 4 जैव-विविधता वाले हॉटस्पॉट वाला देश बताते हुए कहा, 'दुनिया के 2.4 फीसद भूमि क्षेत्र के साथ, भारत दुनिया के ज्ञात जैव-विविधता के लगभग 8 फीसद का योगदान देता है। इनमें पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट, भारत-म्यांमार परिदृश्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मौजूद हैं।' इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया भर से प्रवासी पक्षियों की लगभग 500 प्रजातियों का घर है।
संरक्षण के मूल्यों पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि भारत संरक्षण, स्थायी जीवन शैली और हरित विकास मॉडल के मूल्यों के आधार पर क्लाइमेट एक्शन पर खड़ा उतरा है। उन्होंने कहा, 'गांधी जी से प्रेरित, अहिंसा और जानवरों और प्रकृति के संरक्षण के लोकाचार को भारत के संविधान में उपयुक्त रूप से स्पष्ट किया गया है। इसे लेकर कई कानून और विधान भी हैं।'
बता दें कि सोमवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र (UN) कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज (CMS) का उद्घाटन किया। गुजरात के गांधीनगर में आयोजित किया जा रहा संयुक्त राष्ट्र सीएमएस आज से शुरू हो गया और 22 फरवरी को चलेगा। इस शिखर सम्मेलन में 110 से अधिक देशों के 1200 प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा ताकि प्रवासी प्रजातियों की खतरनाक गिरावट पर विचार-विमर्श किया जा सके। प्रवासी प्रजाति (कन्वेंशन COP13) सम्मेलन की 13 वीं बैठक में जानवरों के प्रवासी पैटर्न पर बुनियादी ढांचे के विकास के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
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