होम आरक्षण पर लोकसभा में बवाल, विपक्ष का आरोप आरक्षण ख़त्म करना चाहती है मोदी सरकार
आरक्षण पर लोकसभा में बवाल, विपक्ष का आरोप आरक्षण ख़त्म करना चाहती है मोदी सरकार
सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद एक बार फिर पदोन्नति में आरक्षण को लेकर विवाद गहरा गया है. शीर्ष अदालत ने शु्क्रवार को अपनी टिप्पणी में कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है और इसे लागू करना या न करना राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है. कोर्ट ने कहा कि कोई अदालत एससी और एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के आदेश जारी नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को विपक्षी नेता आरक्षण पर खतरे के तौर पर देख रहे हैं और इसपर सियासी बवाल शुरू हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट का सरकारी नौकरियों की नियुक्ति में आरक्षण और प्रमोशन में आरक्षण को लेकर दिए फैसले पर संसद में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ. विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की चौतरफ़ा घेराबंदी की. अदालत ने अपने फ़ैसले में ये कहा था कि नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं है. इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार आरक्षण को बचाने में नाक़ामयाब रही.
सदन में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी और टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने सराकर पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से एससी और एसटी आरक्षण पर हमले तेज़ होते जा रहे हैं. कांग्रेस सांसदों ने सदन में 'मोदी सरकार हाय हाय' के नारे लगाए. असल में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार नियुक्ति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है और पदोन्नति में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है.
इसके जवाब में केंद्र सरकार ने दावा किया कि 2012 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी और उसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की थी. रक्षा मंत्री और लोकसभा के उपनेता राजनाथ सिंह ने कहा, "मेरा ये आरोप है कि कांग्रेस संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति कर रही है."
संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों को कार्यवाही से बाहर निकाल दिया जाए. इसके जवाब में बिरला ने कहा कि वो इस पर ग़ौर करेंगे.
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