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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Oct 11, 2021 08:42 PM

मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना कर लोगों ने मांगी दुआएं

मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना कर लोगों ने मांगी दुआएं

मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना कर लोगों ने मांगी दुआएं

महर्षि कात्यायन की पुत्री व मां दुर्गा के छठें स्वरूप मां कात्यायनी की राजधानी के सभी मंदिरों में विधि-विधान से पूजा की गई। इस दौरान जहां मंदिरों में माता के नाम के जयकारे पूरे दिन लगते रहे। वहीं मंदिरों में माता की मूर्ति को उनके प्रिय पीले रंगों के पुष्पों से सुसज्जित किया गया। यही नहीं मां का श्रृंगार भी पीले रंग के वस्त्रों से किया गया। दिल्ली के करोलबाग स्थित झंडेवालान मंदिर के सचिव कुलभूषण आहूजा ने कहा कि मौसम को ध्यान में रखते हुए हमने पेयजल की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में की है ताकि अंतिम छोर तक खडे श्रद्धालुओं को पेयजल मिल पाए। इस दौरान मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों में जोश बरकरार रखने व उत्साह बढाने के लिए मां की भेंटें, गीत-संगीत व श्लोक लगाए गए। वहीं दर्शनार्थियों को मां झंडेवाली का प्रसाद भी वितरित किया जा रहा है। जिसके छोटे-छोटे पैकेट सेवादारों द्वारा लगातार बनाए जा रहे हैं।

मां के साथ मिल रहा है बाबा जी का आशीर्वाद
छतरपुर मंदिर के मीडिया प्रभारी डॉ- किशोर चावला ने कहा कि मां के छठें स्वरूप मां कात्यायनी का विधि-विधान से पूजन होने के साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ निरंतर जारी है। छतरपुर मंदिर अनंत विभूषित बाबा संत नागपाल जी द्वारा स्थापित आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है जहां मां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है। मां के दर्शनों के साथ ही बाबा नागपाल के आशीर्वाद का फल भी भक्तों को मिल जाता है।

तीन दिन होगी मंदिर में अधिक भीड
बता दें कि नवरात्रि के तीन दिनों का पौराणिक कथाओं में अधिक महत्व है। इस दिन देवी-दर्शन से मनोकामना सिद्ध होने की बात कही जाती है। इसलिए नवरात्रि के सप्तमी, अष्टमी व नवमीं के दिन मंदिरों में अधिक भीड होने की संभावना कालकाजी मंदिर प्रशासन द्वारा जताई जा रही है।

आज होगा मां कालरात्रि का पूजन
अपने साधक को भयमुक्त करने वाली मां कालरात्रि का पूजन नवरात्रि के सातवें दिन यानि आज विधि-विधान से मंदिरों में किया जाएगा। मां का यह स्वरूप देखने में बहुत भयानक होता है। मां के इस स्वरूप से दैत्य, राक्षय, भूत, प्रेत भयभीत होकर भाग जाते हैं। इस दिन ब्रहमांड की समस्त सिंद्धियों का द्वार खुलेने लगता है। मां को काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, रूद्रानी, चामुंडा, चंडी के नाम से जाना जाता है। उनके नाममात्र से समस्त पापों व विध्नों का नाश होता है।

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