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कन्हैया कुमार: क्या संसद जाने की जल्दी में सीपीआई छोड़ कांग्रेस का थामा दामन
जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (सीपीआई) के टिकट पर बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके कन्हैया कुमार मंगलवार को कांग्रेस में शामिल हो गए.
पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में दिल्ली स्थित मुख्यालय में वो कांग्रेस में शामिल हुए. गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भी उनके साथ कांग्रेस की सदस्यता ली.
कन्हैया कुमार ने कहा कि वो देश को बचाने के लिए कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ही महात्मा गांधी और भगत सिंह के सपने को बचा सकती है.
उन्होंने कहा, "आप अपने दुश्मन का चुनाव कीजिए, दोस्त अपने आप बन जाएंगे. हम देश की सबसे लोकतांत्रिक पार्टी में इसलिए शामिल होना चाहते हैं क्योंकि अगर कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा."
कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस (महात्मा) गांधी के विचारों को लेकर आगे बढ़ेगी.
कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी बीते कुछ दिनों से अपुष्ट सूत्रों के हवाले से आ रहीं थीं. कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने सोमवार को बताया था कि वो मंगलवार को दोपहर बाद तीन बजे कांग्रेस में शामिल होंगे.
लेकिन, मंगलवार को लगभग उसी समय पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया और कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने का एलान कुछ देर बाद हो सका.
'विचारधारा नहीं रखती मायने'
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कन्हैया कुमार के शामिल होने से पार्टी मज़बूत होगी. वहीं सीपीआई ने कन्हैया कुमार पर 'मौकापरस्त' होने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके पास न तो कोई 'जनाधार है और न ही उन्होंने कोई संघर्ष किया है.' ऐसे में उनको साथ लेकर कांग्रेस को कोई फ़ायदा नहीं होगा.
सीपीआई के सीनियर नेता अतुल कुमार अंजान ने बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से कहा कि कन्हैया कुमार 'राज्यसभा पहुंचने की जल्दी में हैं.'
अतुल कुमार अंजान ने कहा, "वो बहुत जल्दी में हैं संसद और राज्यसभा पहुंचने की. मैं उनको शुभकामना देता हूं कि वो कांग्रेस पार्टी में गए हैं तो उनके सारे अरमान, लोकसभा, राज्यसभा (जाने के) पूर्ण हो जाएं."
अतुल कुमार अंजान ने कहा कि सीपीआई में विचारधारा अहम है लेकिन कन्हैया कुमार के लिए विचारधारा कोई मायने नहीं रखती है. वो दावा करते हैं कि कन्हैया कुमार लंबे समय से नई पार्टी की तलाश कर रहे थे.
वो कहते हैं, "अगर उनकी सोच में दिक्कत न होती तो कम्युनिस्ट पार्टी से कांग्रेस में क्यों जाते? इससे पहले वो जेडीयू में जा रहे थे. बड़ी चर्चा थी उनकी चार महीने पहले. वो (बिहार के मुख्यमंत्री) नीतीश कुमार जी से भी मिले थे. "
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