होम मिडिल ईस्ट संकट पर केंद्र की सर्वदलीय बैठक, TMC का बहिष्कार, राहुल गांधी की गैरहाज़िरी से सियासी हलचल तेज

समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Mar 25, 2026 06:30 PM

मिडिल ईस्ट संकट पर केंद्र की सर्वदलीय बैठक, TMC का बहिष्कार, राहुल गांधी की गैरहाज़िरी से सियासी हलचल तेज

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक हालात को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बुधवार को शुरू हो गई। इस अहम बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत पर संभावित प्रभाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

मिडिल ईस्ट संकट पर केंद्र की सर्वदलीय बैठक, TMC का बहिष्कार, राहुल गांधी की गैरहाज़िरी से सियासी हलचल तेज

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक हालात को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बुधवार को शुरू हो गई। इस अहम बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत पर संभावित प्रभाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं और इसमें विपक्षी दलों के सुझाव भी लिए जा रहे हैं।

TMC ने किया बहिष्कार, राहुल गांधी भी नहीं पहुंचे

बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीतिक विवाद सामने आ गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान किया। पार्टी सांसद सौगत रॉय ने कहा, "हमारी पूरी लड़ाई BJP के साथ है, हम उनके साथ बैठक क्यों करेंगे?"

वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि वह केरल में तय कार्यक्रम के कारण बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने बैठक से एक दिन पहले केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी तीखा हमला बोला।

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रणनीतिक चर्चा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में सरकार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के असर और भारत की तैयारियों पर चर्चा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जानकारी दी थी कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए सात अधिकार-संपन्न समूह बनाए गए हैं, जो एलपीजी, आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की लगातार समीक्षा करेंगे।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बैठक में शामिल हुए कई बड़े नेता

सर्वदलीय बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, बीजेडी के सस्मित पात्रा, जेडीयू के लल्लन सिंह और संजय झा तथा सीपीआईएम के जॉन ब्रिटास भी बैठक में शामिल हुए।

एनडीए नेताओं ने इस बैठक को जरूरी बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित में सभी दलों को साथ आकर समाधान तलाशना चाहिए।

राहुल गांधी ने विदेश नीति पर उठाए सवाल

बैठक से पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति केंद्र सरकार की निजी पॉलिसी बन गई है. अब यह एक यूनिवर्सल मजाक जैसा हो गया है. अगर हमारे प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं तो फॉरेन पॉलिसी कॉम्प्रोमाइज्ड है. हमारी क्या पोजीशन है? लोगों को इसका नुकसान होगा? अभी केवल शुरुआत हुई है. अभी सभी चीजों में परेशानी होगी. अमेरिका और इजरायल जो कहेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहीं कहेंगे."

वैश्विक हालात पर भारत की रणनीति पर नजर

मिडिल ईस्ट संकट के बीच आयोजित यह सर्वदलीय बैठक भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक प्रभावों को लेकर अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति और विपक्ष के सुझावों के आधार पर आगे के कदम तय किए जा सकते हैं।

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