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टारगेट किलिंग: बिहार व यूपी के मजदूरों का कश्मीर घाटी से पलायन
कश्मीर घाटी में बिहार और यूपी के मजदूरों की टारगेट किलिंग शुरू होने के बाद प्रवासी मजदूर अपनी जान बचाकर घाटी से बाहर निकल जाना चाहते हैं। अमृतसर रेलवे स्टेशन पर गाड़ी का इंतजार करते इन मजदूरों के चेहरों पर दहशत थी। वह घाटी में टारगेट किलिंग के बारे में कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं।
बिहार के बेतियां जिला के थाना जगदीशपुर के गांव जगदीशपुर के मोहम्मद अंसारी, अमरुदीन अंसारी, रुद मोहम्मद ने बताया कि वे 7-8 महीने पहले कश्मीर घाटी में मेहनत मजदूरी करने गए थे। वह शोपियां जिले के पंजूरा क्षेत्र में रह रहे थे। वहां राजमिस्त्री का काम करते थे।
उन्होंने बताया कि वहां वे लोग काम के अलावा बहुत कम बाहर निकलते थे। भारतीय सेना के जवान उन्हें रास्ते पर मिलने पर उनकी सुरक्षा बाबत पूछते और आपात हालात में उनके पास आने को कहते रहते थे। उन्होंने बताया कि अपने घर लौटते समय वे बच्चों के लिए कश्मीर घाटी की सौगात सेब लेकर आए हैं ताकि बच्चों को कश्मीर की सौगात दे सकें।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला के गांव बाघा गाड़ा के राजू और कुशीनगर के नरेश साहनी, वकील (नाम), पिंटू, रंजे और अंगद ने बताया कि वे लोग अगस्त 2021 में ही कश्मीर घाटी में मजदूरी करने पहुंचे थे। उन्होंने खड्ड से रेत निकालने का काम शुरू किया। घाटी में तेजी से हालात खराब होने की बात कही और बताया कि अब वहां सर्दी भी बढ़ने लगी है तो इन हालातों में काम करने में मुश्किल होने लगी तो उन्होंने सुरक्षित अपने घरों में लौटना ही बेहतर समझा।
उन्होंने बताया कि यूपी और बिहार के सैंकड़ों की संख्या में लोग घाटी में मजदूरी करते हैं और अब उनका पलायन शुरु हो चुका है। घाटी से अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंचे इन प्रवासी मजदूरों ने बताया कि यहां पहुंच कर वे लोग खुद को सुरक्षित मान रहे हैं।
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