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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Oct 3, 2022 03:04 PM

शाहजहाँपुर: श्री चित्रगुप्त महिला विद्यालय जू० हा० स्कूल में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई

श्री चित्रगुप्त महिला विद्यालय जू० हा० स्कूल, रोशनगंज, शाहजहाँपुर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई

शाहजहाँपुर: श्री चित्रगुप्त महिला विद्यालय जू० हा० स्कूल में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई

शाहजहाँपुर। श्री चित्रगुप्त महिला विद्यालय जू० हा० स्कूल, रोशनगंज, शाहजहाँपुर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई । विद्यालय प्रबंधक डॉ0 अविनाश सक्सेना ने इस अवसर पर गांधीजी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया। प्रबंधक डॉ अविनाश सक्सेना ने कहा कि भारत के इतिहास में दो अक्टूबर के दिन का एक खास महत्व है। यह दिन देश की दो महान विभूतियों के जन्मदिन के तौर पर इतिहास के पन्नों में दर्ज है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनके कार्यों तथा विचारों ने देश की स्वतंत्रता और इसके बाद आजाद भारत को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई।

वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनकी सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे। उन्होंने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था। बाद के दिनों में 'मरो नहीं, मारो' का नारा भी लालबहादुर शास्त्री ने दिया जिसने एक क्रांति को पूरे देश में प्रचंड किया।भारत-पाक युद्ध के दौरान जब अमेरिका से शास्त्री जी को धमकी मिली कि यदि आप पाक युद्ध बंद नहीं करेंगे तो भारत को गेहूं भेजना बंद कर दिया जाएगा। दरअसल, उस वक्त भारत गेहूं उत्पादन में आत्मनिर्भर न था। इस समस्या का समाधान खोजने लिए उन्होंने सर्वप्रथम अपने घर के सदस्यों से कहा कि हम लोग हफ्ते में एक वक्त भोजन नहीं करेंगे। इसी फॉर्मूले को उन्होंने भारत की जनता से अपनाने की अपील की ताकि अमेरिका के आगे झुकना न पड़े। शास्त्री की अपील का असर हुआ और लोगों ने व्रत रखकर कई किलो अनाज देश के लिए बचाया। लाल बहादुर शास्त्री जी की ऐसी बहुत सी कहानियां है जिनको अगर सुनाया जाए तो दिन और रात भी कम पड़ जाएगा।                                 

   समाजसेवी एवं पत्रकार आकाश सक्सेना ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। 2 अक्टूबर को हर वर्ष गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। सत्य और अहिंसा को लेकर बापू के विचार हमेशा से न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। 2 अक्टूबर को हर साल अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तरप्रदेश में 'मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव' के यहां हुआ था। उनकी माता का नाम 'रामदुलारी' था। आज उनकी जयंती है।

साफ छवि और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए मशहूर इस नेता के जीवन से आज के युवा बहुत कुछ सीख सकते हैं। सच कहें तो लाल बहादुर शास्त्री का पूरा जीवन ही एक सीख है। कैसे आभावों में रहने वाला एक बच्चा अपनी कठोर मेहनत के बल पर भारत का प्रधानमंत्री बना। ये सफर आज भी प्रेरणादायक है। लालबहादुर शास्त्री के जीवन से हमें संयम, सादगी, मितव्ययिता की सीख मिलती है। उनके जीवन के कई ऐसे अहम पहलु हैं, जिन्हें आज भी लोग बहुत कम जानते हैं।आज के राजनेताओं की छवि लंबे-चौड़े काफिले के साथ गाड़ियों में बैठे शख्स के तौर पर होती है।

लेकिन लालबहादुर शास्त्री ऐसे नहीं थे। उन्होंने प्रधानमंत्री होते हुए एक भी रुपये का गलत फायदा नहीं उठाया। प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्हें 500 रुपए तनख्वाह मिलती थी। इतने में उनके घर के सभी सदस्यों का गुजर-बसर संभव न था। इसलिए वे पद पर रहते हुए भी अखबारों में लेख लिखा करते थे। इसी अतिरिक्त आय से वह अपना परिवार चला पाते थे। अपनी मेहनत के बल पर ही वे कर्तव्यनिष्ठ और नैतिक बने रहे। संयुक्त जयंती के अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने विभिन्न रंगारंग मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिसको काफी सराहा गया।        कार्यक्रम का संचालन प्रधानाध्यापिका श्रीमती सुनीता सिन्हा ने किया ।                                                        कार्यक्रम में श्रीमती सुनीता सिन्हा,श्रीमती शुभा गौतम, श्रीमती बबिता,श्रीमती अर्पणा कुमारी, श्रीमती इंद्रमोहिनी बाजपई, श्रीमती सुशीला भारती, श्रीमती रीता गुप्ता, श्रीमती आरती श्रीवास्तव, श्रीमती चितवन गुप्ता अध्यापिकाएं उपस्थित रहीं।श्रीमती श्यामलता आदि का सहयोग रहा।

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