होम यूपी में जनजातीय गौरव को मिली नई पहचान, CM योगी ने बदली वंचित समाज की तस्वीर, 11 लाख से अधिक लोगों का जीवन हुआ सार्थक
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनजातीय समाज के जीवन में आए बदलाव को सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनजातीय समाज के जीवन में आए बदलाव को सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और 'अंत्योदय से सर्वोदय' का रास्ता खुले। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्यधारा में जगह दिलाई, बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया है।
प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने कई योजनाएं जमीन पर उतारी हैं:
'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'धरती आबा जनभागीदारी अभियान' ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदल दी है। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन (Saturation) कराया है। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं।
जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी सरकार ने भरपूर जोर दिया है:
शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है।
विमुक्त और घुमंतू समुदायों (नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया आदि) को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया है, जिनके लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।
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