होम Lakhimpur Kheri News: मुस्तफाबाद में नहीं है मुस्लिम आबादी, फिर क्यों रखा गया ये नाम? सीएम योगी ने बताई गांव का नाम ‘कबीरधाम’ करने की असली वजह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखीमपुर खीरी जिले के मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर ‘कबीरधाम’ करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव लाएगी।
Lakhimpur Kheri News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखीमपुर खीरी जिले के मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर ‘कबीरधाम’ करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव लाएगी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एक चौंकाने वाली बात कही —
“मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि गांव का नाम मुस्तफाबाद है, जबकि यहां कोई मुस्लिम आबादी नहीं है।”
लखीमपुर-अलीगंज मार्ग पर स्थित यह गांव गोला तहसील के टेंडुआ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है, जो खीरी जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर है। वर्षों पहले यहां विश्व कल्याण आश्रम की स्थापना हुई थी, जो संत कबीर दास की शिक्षाओं और विचारों के प्रचार-प्रसार का कार्य करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम परिवर्तन से इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान फिर से स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि ‘कबीरधाम’ नाम इस गांव के आध्यात्मिक महत्व और संत परंपरा का सम्मान करता है।
गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग राम बिलास ने नाम परिवर्तन के फैसले को सही बताया। उन्होंने कहा,
“आश्रम के कारण ही यहां महत्वपूर्ण लोग आते हैं, और अब उम्मीद है कि नए नाम से गांव में विकास कार्य भी बढ़ेंगे।”
ग्रामीण विनोद कुमार ने भी कहा कि ‘कबीरधाम’ नाम से गांव की पहचान मजबूत होगी और सरकार का ध्यान विकास योजनाओं की ओर जाएगा। वहीं रामपाल और राम किशोर ने कहा कि आश्रम की मौजूदगी के बावजूद गांव अब तक उपेक्षित रहा, लेकिन अब यह बदलाव सकारात्मक प्रभाव लाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष और गोला नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला ने कहा कि नाम परिवर्तन से गांव को नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा,
“‘कबीरधाम’ नाम से अब यह जगह विकास परियोजनाओं के लिए अधिक ध्यान आकर्षित करेगी।”
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाम परिवर्तन का यह निर्णय संत कबीर से जुड़े क्षेत्र की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गरिमा को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि इस क्षेत्र को ‘कबीर परंपरा का केंद्र’ बनाना है।
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