होम यूपी आई कांग्रेस की यात्रा से दूरी, पर तेलंगाना तक जाने को तैयार अखिलेश
यूपी आई कांग्रेस की यात्रा से दूरी, पर तेलंगाना तक जाने को तैयार अखिलेश
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर तमाम दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कन्याकुमारी से कश्मीर तक की 'भारत जोड़ो यात्रा' राहुल गांधी के नेतृत्व में निकल रही है तो सपा, बसपा, टीएमसी आदि जैसे दल भी रणनीति बना रहे हैं।
बीच-बीच में थर्ड फ्रंट की भी सुगबुगाहट भी तेज होने लगती है। पिछले दिनों यूपी आई भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बनाने वाले अखिलेश यादव अब तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की रैली में जाने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके बाद से सवाल उठने लगे हैं कि क्या अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं? क्या उनकी समाजवादी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बजाए अन्य दलों को पसंद करने वाली है।
खम्मम में लगेगा विपक्षी दलों का जमावड़ा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव 18 जनवरी को खम्मम में एक बड़ी रैली को संबोधित करने जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति किया है। इसके बाद यह पहली बड़ी रैली होगी। इस रैली के लिए कई दलों को निमंत्रण भेजा गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब सीएम भगवंत मान, केरल सीएम पिनरई विजयन और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को रैली में शामिल होने के लिए न्यौता भेजा जा चुका है। अखिलेश यादव ने हामी भी भर दी है। इस रैली के जरिए से केसीआर विपक्षी कुनबे को और मजबूत करना चाहते हैं, जिससे अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ा जा सके। उन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पार्टी दफ्तर की शुरुआत की थी।
रैली में जाकर अखिलेश कांग्रेस को दे रहे संदेश?
राजनैतिक जानकार मानते हैं कि 18 जनवरी को केसीआर की रैली में जाने की हामी भरकर अखिलेश यादव ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दे दिया है। अखिलेश पहले भी कांग्रेस और बीजेपी को एक ही जैसी पार्टी बताते रहे हैं। अब जब हिंदी बेल्ट और खासतौर पर यूपी में कांग्रेस काफी कमजोर हो गई है, तो अखिलेश ने बिना किसी हिचक के दूरी बनाना ही बेहतर समझा है। दरअसल, अखिलेश के लिए अतीत में भी कांग्रेस के साथ जाने से कुछ फायदा नहीं मिला है। साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश और राहुल गांधी एक साथ चुनावी मैदान में उतरे थे। दो युवाओं के साथ आने से माना जा रहा था कि बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है, लेकिन चुनावी नतीजों में भगवा पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, यूपी में कांग्रेस का अधिक वोट बैंक भी नहीं होने की वजह से भी अखिलेश थर्ड फ्रंट की ओर देख रहे हैं। उन्होंने इसके जरिए से संदेश दिया है कि वे गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी एकता पर जोर देने वाले हैं। वे कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के मुकाबले क्षेत्रीय दलों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।
बुलाने के बाद भी यात्रा में नहीं पहुंचे थे अखिलेश
कुछ सालों पहले तक कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति अब बदल गई है। यूपी की बात करें तो सपा, बसपा जैसे क्षेत्रीय दल कांग्रेस को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं हैं। इसकी झलक पिछले दिनों तब दिखाई दी, जब कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा लेकर चले राहुल गांधी यूपी पहुंचे। यात्रा में शामिल होने के लिए कांग्रेस ने अखिलेश, जयंत चौधरी के अलावा मायावती को भी न्यौता दिया, लेकिन कोई भी इसमें शामिल नहीं हुआ। अखिलेश यादव ने तो शुरुआत में यहां तक कह दिया कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों एक ही हैं। हमारी पार्टी की विचारधारा अलग है। हालांकि, बाद में अखिलेश यादव और मायावती ने पत्र के जरिए से भारत जोड़ो यात्रा को शुभकामनाएं जरूर दीं। वहीं, जयंत चौधरी भी यात्रा में नहीं पहुंचे, लेकिन अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को भेज दिया। पिछले कुछ दिनों में अखिलेश यादव की रणनीति से साफ हो गया है कि उनके कांग्रेस के साथ जाने के बजाए थर्ड फ्रंट का हिस्सा बनने की ज्यादा संभावनाएं हैं।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।