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जमात की आतंकी गुटों से साठगांठ, ब्रेन वॉश कर बनाए जा रहे दहशतगर्द और उनके मददगार
जमात-ए-इस्लामी को आतंकी फंडिंग मामले में एनआईए के हाथ ठोस सबूत लगे हैं। जांच एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक, जमात नकेल के बावजूद चैरिटी के नाम पर हासिल किए गए चंदे को लश्कर और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों तक पहुंचा रहा है। कट्टरपंथ के प्रसार के जरिए स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश करने की कवायद भी चल रही है जिससे स्थानीय युवा आतंकियों के मददगार बन सकें या आतंकी संगठनों का दामन थाम लें। एनआईए लगातार इस मामले की छानबीन कर रही है। जमात पर शिकंजा कसने के लिए धरपकड़ भी जारी है।
अधिकारियों के मुताबिक, जमात चैरिटी के नाम पर मिले पैसे का अलगाववादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करता रहा है। सीमापार से मिले निर्देशों के मुताबिक अस्थिरता की योजना पर परदे के पीछे से काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में जमात-ए-इस्लामी को प्रतिबंधित कर दिया था। एनआईए ने इसके खिलाफ अलग-अलग कई मामले दर्ज किए हैं। पांच फरवरी 2021 को दर्ज मामले में जमात की आतंकी फंडिंग सहित अन्य गतिविधियों का जिक्र था।
हिंसक और अलगाववादी गतिविधियों में फंड का इस्तेमाल
जमात के सदस्य देश-विदेश से दान और अन्य कल्याणकारी कामों के लिए फंड इकट्ठा कर रहे थे लेकिन कथित तौर पर इस धन का इस्तेमाल हिंसक और अलगाववादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। एनआईए सूत्रों का कहना है कि यह संगठन जम्मू कश्मीर में अलगाववादी विचारधारा और आतंकवादी मानसिकता के प्रसार के लिए प्रमुख तौर पर जिम्मेदार माना जाता रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, संगठन द्वारा जुटाई जा रही धनराशि जमात-ए-इस्लामी के सुव्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को भी पहुंचाई जा रही थी।
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