होम UP Rajya Sabha Election: बीजेपी के सामने राजभर फैक्टर की चुनौती, क्या बिगड़ेगा आखिरी सीट का गणित?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए शुरुआती चुनावी गणित में बीजेपी आठ सीटों पर और समाजवादी पार्टी दो सीटों पर जीत हासिल करने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए शुरुआती चुनावी गणित में बीजेपी आठ सीटों पर और समाजवादी पार्टी दो सीटों पर जीत हासिल करने की स्थिति में दिखाई दे रही है। हालांकि, अगर बीजेपी अतिरिक्त सीट के लिए उम्मीदवार उतारती है तो उसके सामने विधायकों के समर्थन का गणित चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस स्थिति में ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अहम भूमिका में आ सकते हैं।
सुभासपा के कुल छह विधायक हैं और इनमें से कुछ विधायकों के पार्टी से दूरी बनाने की चर्चा पहले से होती रही है। खुद ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर भी कुछ समय पहले पार्टी के कुछ विधायकों की नाराजगी या दूरी की बात की पुष्टि कर चुके हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में सुभासपा विधायकों का रुख बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओम प्रकाश राजभर के विधायकों में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी लगातार समाजवादी पार्टी के साथ नजर आ रहे हैं। इसके अलावा भी सुभासपा के कई विधायक सपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में अगर बीजेपी राज्यसभा चुनाव में आठवीं सीट के लिए भी आगे बढ़ती है तो उसे अपने गठबंधन के सभी विधायकों का समर्थन बनाए रखने की जरूरत होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 सीटों के मुकाबले इस समय 397 विधायक हैं। इनमें बीजेपी के पास 259 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के गठबंधन के पास कुल 295 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। इसके अलावा अपना दल सोनेलाल के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5, कांग्रेस के 2 और जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक के 2 विधायक हैं। तीन विधायक असंबद्ध हैं, जिनमें मनोज पांडेय, राकेश सिंह और अभय सिंह शामिल हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 वोटों की जरूरत है। मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी सात सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करने की स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें हासिल कर सकती है। सात सीटों के बाद बीजेपी के पास 36 विधायक बचते हैं, वहीं सपा के पास 29 विधायक रह जाते हैं।
ऐसे में दसवीं सीट का मुकाबला महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर बीजेपी एक अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो उसके लिए 37 वोट जुटाना चुनौती बन सकता है। इस स्थिति में सुभासपा के छह विधायक चुनावी गणित को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर उन विधायकों को लेकर चर्चा है जो पार्टी नेतृत्व से दूरी और सपा से नजदीकी को लेकर पहले से सुर्खियों में रहे हैं।
पिछले राज्यसभा चुनाव में भी विधायकों के रुख और क्रॉस वोटिंग ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया था। ऐसे में इस बार भी अगर बीजेपी अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है तो विधायकों के समर्थन का गणित दिलचस्प हो सकता है। फिलहाल 10 उम्मीदवारों के लिहाज से उपलब्ध संख्या का गणित स्पष्ट है, लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आने पर समीकरण बदल सकते हैं। सुभासपा के विधायकों का रुख इस पूरे मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।