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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team May 25, 2023 09:32 PM

सपा-आरएलडी गठबंधन में टकराव, 2024 में कैसे होगा अखिलेश यादव और जयंत चौधरी का बेड़ा पार?

सपा-आरएलडी गठबंधन में टकराव, 2024 में कैसे होगा अखिलेश यादव और जयंत चौधरी का बेड़ा पार?

सपा-आरएलडी गठबंधन में टकराव, 2024 में कैसे होगा अखिलेश यादव और जयंत चौधरी का बेड़ा पार?

उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव (UP Nagar Nikay Chunav) में समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) गठबंधन की हार लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) में बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) के सिपाही अब खुलकर एक-दूसरे को हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. लखनऊ (Lucknow) और दिल्ली (Delhi) तक कार्यकर्ताओं की नाराजगी तपिश बढ़ा रही है. दोनों ही दलों के नेता बेहद परेशान हैं, जबकि बीजेपी (BJP) को इस टकराव से फायदा होगा.

आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय की सपा से नाराजगी ने भी आग में घी डालने का काम कर दिया है. आरएलडी ने जीत और हार की समीक्षा और 2024 की रणनीति के लिए मेरठ में जो समीक्षा बैठक बुलाई, उसमें पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा उबाल के रूप में सामने आ गया. हार का ठीकरा न सिर्फ सपा पर फोड़ा गया बल्कि गठबंधन पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया. यानी पहले भले ही दबी जुबान में गठबंधन पर सवाल खड़े किए जा रहे थे, लेकिन अब खुलकर मुखालफत शुरू हो गई है. आरएलडी के बैनर से पार्षद चुनाव लड़े पार्टी के ज्यादातर प्रत्याशी मेरठ नगर निगम पार्षद का चुनाव हार गए.

सपा के इन विधायकों पर लगा AIMIM के लिए प्रचार का आरोप

आरएलडी प्रत्याशियों की हार के लिए सपा को खुलकर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. सपा के विधायक शाहिद मंजूर और हाजी रफीक अंसारी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ और एआईएमआईएम के लिए प्रचार किया. यही हाल रहा तो 2024 में हमारे जयंत चौधरी को भी दिक्कत हो सकती है.

मेरठ मेयर चुनाव में तीसरे नंबर पर रही थी सपा

दरअसल, मेरठ में सपा ने विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन पार्टी के दिग्गज नेता विरोध में आ गए. नतीजा ये रहा कि सपा प्रत्याशी सीमा प्रधान चुनाव हारी ही नहीं बल्कि तीसरे नंबर पर आ गई. बीजेपी के हरिकांत अहलूवालिया चुनाव जीत गए और एआईएमआईएम के मोहम्मद अनस दूसरे पर रहे. बस यहीं से सपा-आरएलडी गठबंधन पर सवाल खड़े होने लगे और जो प्रत्याशी हारे वो भविष्य में गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं. हालांकि, आरएलडी नेताओं का कहना है गठबंधन विधानसभा में था, निकाय चुनाव में नहीं, लेकिन ये नाराजगी क्षणिक है जो 2024 में दूर हो जाएगी.

सपा और आरएलडी में बढ़ रही तल्खी

आरएलडी के नेता जिन सपा के नेताओं को हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, उनका कहना है कि हार के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं, जनता का फैसला है. सपा गठबंधन में चल रही आपसी कलह और सपा नेताओं की पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ वायरल हो रहा वीडियो भी आग में घी डालने का काम कर रहा है. ऐसे में सपा और आरएलडी में तल्खी बढ़ती जा रही है. हालांकि, बीजेपी ने इस तकरार पर चुटकी ली है कि ये गठबंधन नहीं ठगबंधन है.

2024 से पहले सपा के सामने बड़ी चुनौती

यही वजह है कि अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के लिए मुश्किल कम नहीं है, साथ ही 2024 की राह भी क्योंकि जिन सिपाहियों के दम पर पार्टी खड़ी है, यदि वही विरोध में खड़े हो जाएंगे तो क्या होगा. अब टेंशन इतनी बढ़ी हुई है कि आखिर नाराज कार्यकर्ताओं को समझाया कैसे जाए, क्योंकि ये काम सबसे ज्यादा चुनौती भरा है.

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