होम मिटने लगी दूरी, अध्यादेश बना मजबूरी? खड़गे-राहुल से मिलने का समय मांगेंगे केजरीवाल

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team May 25, 2023 09:21 PM

मिटने लगी दूरी, अध्यादेश बना मजबूरी? खड़गे-राहुल से मिलने का समय मांगेंगे केजरीवाल

मिटने लगी दूरी, अध्यादेश बना मजबूरी? खड़गे-राहुल से मिलने का समय मांगेंगे केजरीवाल

मिटने लगी दूरी, अध्यादेश बना मजबूरी? खड़गे-राहुल से मिलने का समय मांगेंगे केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कल यानी शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ 'AAP' की लड़ाई के लिए समर्थन जुटाने के सिलसिले में देशव्यापी दौरे पर हैं।

कई नेताओं से मिलने के बाद अब उनका अगला लक्ष्य देश की मुख्य विपक्षी पार्टी से मिलना है। केजरीवाल पहले ही महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के मुलाकात कर उनका समर्थन हासिल कर चुके हैं। वहीं गुरुवार को उन्होंने शरद पवार से भी मुलाकात की थी। पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के केजरीवाल को समर्थन देने का वादा किया है। महाराष्टर में उद्धव सेना, एनसीपी और कांग्रेस सहयोगी हैं।

राहुल-खड़गे से मांगेंगे समय- केजरीवाल

शरद पवार से मुलाकात के बाद मुंबई में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''... केंद्र के अध्यादेश को राज्यसभा में हराया जा सकता है। यह राजनीति का नहीं बल्कि देश का मसला है... और सभी दल जो देश से प्यार करते हैं उन्हें एक साथ आना चाहिए। शरद पवार जी ने हमें आश्वासन दिया है कि एनसीपी हमारा समर्थन करेगी ... हम सभी गैर-बीजेपी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।" इसी दौरान केरजीवाल ने कहा, "कल, मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से इस मुद्दे पर मिलने के लिए समय मांगूंगा।"

क्या केजरीवाल कांग्रेस का वोट हासिल कर पाएंगे?

अरविंद केजरीवाल ठाकरे की सेना, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा को एक साथ लाने में कामयाब रहे हैं। लेकिन उनके लिए कांग्रेस को साथ लाना एक मुश्किल भरा काम होगा। खासकर तब जब, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने दिल्ली से संबंधित केंद्र सरकार के अध्यादेश के विषय पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोला है। माकन ने मंगलवार को पार्टी आलाकमान से आग्रह किया कि वह इस मामले में आम आदमी पार्टी एवं केजरीवाल का समर्थन न करें। हालांकि, दिल्ली कांग्रेस नेता के आग्रह को अंतिम शब्द नहीं माना जा सकता है। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभी तक केजरीवाल के समर्थन पर पसोपेश में हैं।

नीतीश कुमार अहम कड़ी?

केजरीवाल के पास एक संभावित ट्रम्प कार्ड है। वह है - बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। नीतीश ने रविवार को कहा था कि वह 'ऐसे असंवैधानिक उपायों पर रोक लगाने' की लड़ाई में अपने दिल्ली समकक्ष केजरीवाल का समर्थन करते हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख पिछले महीने राहुल गांधी के साथ एक बैठक के बाद उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी सहित पिछले कुछ हफ्तों में देश भर के राजनीतिक नेताओं से मिले हैं। माना जा रहा है कि नीतीश दिल्ली में केजरीवाल और कांग्रेस नेताओं की बैठक कराने में भूमिका निभा सकते हैं।

आप को कांग्रेस का समर्थन 2024 से पहले एक महत्वपूर्ण मोड़?

दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और तैनाती को लेकर मोदी सरकार द्वारा लाए गए हालिया अध्यादेश ने अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी को अपने पहले के रुख से समझौता करने के लिए मजबूर किया है। आप हमेशा कहती आई है कि वह कभी भी कांग्रेस के साथ साझेदारी नहीं करेगी। लेकिन अब हालात कुछ और हैं। आप के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस को यह भी तय करना होगा कि वह भारत के लोकतंत्र और संघीय ढांचे के पक्ष में है या उसके खिलाफ। कई राज्यों में आप और कांग्रेस के बीच एक कड़वी राजनीतिक लड़ाई देखने को मिली। लेकिन जब राहुल गांधी को 'मोदी सरनेम के मुद्दे' पर उनकी टिप्पणी के लिए सजा मिली और फिर सांसदी गई, तो केजरीवाल ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए कांग्रेस नेता का समर्थन किया।

आप-कांग्रेस में दोस्ती हो गई तो क्या?

यदि कांग्रेस और आप दोस्त बन जाते हैं, तो 2024 में एक व्यापक भाजपा विरोधी मोर्चा बुनने की तीन बाधाओं में से एक दूर हो जाएगी। आप के बाद, टीएमसी और बीआरएस एकजुट विपक्ष बनाने के रास्ते में अन्य दो सबसे बड़ी बाधाएं हैं। टीएमसी ने पहले ही यह कहकर तेवर नरम करने के संकेत दिए हैं कि वह कुछ शर्तों के साथ कांग्रेस को समर्थन दे सकती है। बीआरएस एकमात्र प्रमुख विपक्षी पार्टी है जो अभी भी एकजुट विपक्ष पर चुप है। अभी तक, दिल्ली और पंजाब में आप की चुनावी उपस्थिति जबरदस्त है। हालांकि, AAP ने राष्ट्रीय राजधानी में एक भी लोकसभा सीट नहीं जीती क्योंकि भाजपा विरोधी वोट केजरीवाल की पार्टी और कांग्रेस के बीच विभाजित हुए हैं। यदि आप और कांग्रेस दिल्ली में सीटों के बंटवारे पर समझौता करती है, तो आप दिल्ली में अपना खाता खोल सकती है और कांग्रेस के भी राष्ट्रीय राजधानी में सांसद या विधायक हो सकते हैं।

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