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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team May 24, 2026 06:36 PM

गोबर से बदल रही गांवों की तस्वीर... महिलाओं की बढ़ी कमाई, किसानों को भी हो रहा बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश में गोशालाएं अब सिर्फ गो संरक्षण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का बड़ा माध्यम बनती जा रही हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की पहल पर गोवंश संरक्षण को रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर नया विकास मॉडल तैयार किया गया है,

गोबर से बदल रही गांवों की तस्वीर... महिलाओं की बढ़ी कमाई, किसानों को भी हो रहा बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश में गोशालाएं अब सिर्फ गो संरक्षण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का बड़ा माध्यम बनती जा रही हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की पहल पर गोवंश संरक्षण को रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर नया विकास मॉडल तैयार किया गया है, जिसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है।

7700 से ज्यादा गोशालाओं में संरक्षित हैं 12 लाख गोवंश

प्रदेश में इस समय 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हो रही हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। सरकार की इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए हैं।

योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से ज्यादा गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी फायदा मिल रहा है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला नया रोजगार

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष Shyam Bihari Gupta ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को सीधे रोजगार मिला है।

उन्होंने बताया कि गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

उन्नाव में गोबर से बन रहा प्राकृतिक पेंट

प्रदेश के Unnao जिले में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रही हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित बताया जा रहा है।

पर्यावरण के अनुकूल होने की वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार हुआ है।

जैविक खाद और बायोगैस से बढ़ रही किसानों की आय

श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को कचरा नहीं बल्कि आय और रोजगार के बड़े संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है।

जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं, जिससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च 30 से 40 प्रतिशत तक कम हुआ है।

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