होम हॉर्मुज खुला, फिर भी क्यों बढ़ गई भारत की चिंता? UN ने दी बड़े ऊर्जा संकट की चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमति बनने के बाद वैश्विक बाजारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई चेतावनी ने कई विकासशील देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने पर सहमति बनने के बाद वैश्विक बाजारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई चेतावनी ने कई विकासशील देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यूएन का कहना है कि मध्य पूर्व में हुए हालिया तनाव ने ऐसा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं।
भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और विकास दर पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मध्य पूर्व का संघर्ष केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, "मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव ने अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. कई विकासशील देशों के लिए यह सिर्फ ऊर्जा का संकट नहीं है, बल्कि यह कर्ज, भोजन और विकास से जुड़ा एक बड़ा झटका भी है. किसी भी शांति समझौते से राहत तो मिलेगी, लेकिन इसके असर लंबे समय तक बने रहने की संभावना है."
यूएन की इस टिप्पणी ने संकेत दिया है कि भले ही सैन्य तनाव कम हो जाए, लेकिन आर्थिक प्रभाव तुरंत खत्म नहीं होंगे।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी या सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि केंद्र सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि देश में कच्चे तेल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई संकट नहीं है। इसके बावजूद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता भारत सहित कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की दिशा में अमेरिका ने भी एक अहम कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अगस्त तक के लिए ढील देने का फैसला किया है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने 'ईरान जनरल लाइसेंस X' जारी किया है। इसके तहत 21 अगस्त तक ईरान से कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, डिलीवरी और निर्यात से जुड़े कई लेन-देन की अनुमति दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत ईरानी तेल लेकर चलने वाले जहाजों के संचालन, बंदरगाह सेवाओं, चालक दल की सुरक्षा, आपातकालीन मरम्मत और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को भी मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा जहाज प्रबंधन, ईंधन आपूर्ति, बीमा, पंजीकरण और बचाव सेवाओं जैसी कई सुविधाओं को भी अस्थायी तौर पर अनुमति दी गई है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के ब्यूर्गेनस्टॉक में बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी यह संकेत देती है कि मध्य पूर्व में पैदा हुआ ऊर्जा संकट केवल तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव खाद्य सुरक्षा, कर्ज के बोझ और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बावजूद दुनिया के कई देशों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।