होम तमिलनाडु में फिर भड़का ‘तमिल गान’ विवाद! विजय सरकार के शपथ समारोह पर सहयोगियों ने भी उठाए सवाल

समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team May 21, 2026 07:03 PM

तमिलनाडु में फिर भड़का ‘तमिल गान’ विवाद! विजय सरकार के शपथ समारोह पर सहयोगियों ने भी उठाए सवाल

तमिलनाडु की राजनीति में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री Joseph Vijay की अगुवाई वाली सरकार के 23 विधायकों के मंत्री पद की शपथ के दौरान राज्य गीत को तय परंपरा के उलट सबसे आखिर में बजाया गया.

तमिलनाडु में फिर भड़का ‘तमिल गान’ विवाद! विजय सरकार के शपथ समारोह पर सहयोगियों ने भी उठाए सवाल

तमिलनाडु की राजनीति में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री Joseph Vijay की अगुवाई वाली सरकार के 23 विधायकों के मंत्री पद की शपथ के दौरान राज्य गीत को तय परंपरा के उलट सबसे आखिर में बजाया गया, जिसके बाद विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों ने भी नाराजगी जाहिर की है।

शपथ समारोह में बदला गया गीतों का क्रम

गुरुवार 21 मई को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले ‘वंदे मातरम’ बजाया गया। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया और अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ बजाया गया।

राजनीतिक विवाद इसलिए बढ़ गया क्योंकि तमिलनाडु में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि राज्य गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में प्रस्तुत किया जाता है। ठीक इसी तरह का क्रम एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भी देखने को मिला था, जिस पर उस समय भी विवाद हुआ था।

TVK ने दी सफाई, राजभवन पर डाली जिम्मेदारी

विवाद बढ़ने के बाद Tamilaga Vettri Kazhagam की ओर से सफाई दी गई। पार्टी नेता Nanjil Sampath ने कहा कि मंत्रियों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन राजभवन की ओर से किया गया था, इसलिए गीतों का क्रम उसी के अनुसार तय हुआ।

उन्होंने कहा, “आज मंत्रियों की शपथ का कार्यक्रम राजभवन ने आयोजित किया गया था, इसलिए तमिल गीत आखिरी में गाया गया। इसमें तमिलनाडु सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। विधानसभा में तमिल गीत सबसे पहले ही गाया जाएगा।”

केंद्र सरकार के सर्कुलर का भी हुआ जिक्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले सरकार के मंत्री Aadhav Arjuna ने दावा किया था कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर की वजह से राज्यपाल कार्यालय की ओर से तमिल गान को तीसरे स्थान पर रखने का दबाव था।

हालांकि इस दावे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है।

DMK ने विजय सरकार को घेरा

मुख्य विपक्षी दल Dravida Munnetra Kazhagam ने इस मुद्दे पर विजय सरकार को निशाने पर लिया है। DMK प्रवक्ता Saravanan Annadurai ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछली बार आश्वासन देने के बावजूद TVK सरकार दोबारा इस मामले में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार तमिल अधिकारों और परंपराओं की रक्षा करने में असफल साबित हुई है।

कांग्रेस और CPI ने भी जताई नाराजगी

सरकार को समर्थन दे रही Indian National Congress और Communist Party of India ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई है।

CPI सचिव M. Veerapandian ने इसे स्थापित परंपरा का उल्लंघन बताया। वहीं कांग्रेस सांसद S. Jothimani ने कहा, “यह बहुत अनुचित है। बीजेपी सरकार राज्यपाल कार्यालय के जरिए तमिल लोगों की भावनाओं और संस्कृति के साथ राजनीति कर रही है।”

राज्य गीत को लेकर बढ़ी सियासी संवेदनशीलता

तमिलनाडु में ‘तमिल थाई वाझथु’ सिर्फ एक राज्य गीत नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसके प्रस्तुतीकरण के क्रम को लेकर उठे विवाद ने राज्य की राजनीति को और संवेदनशील बना दिया है।

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