होम नौवीं बार जीती विधायकी, लगातार दूसरी बार कैबिनेट मंत्री वित्त एवं संसदीय कार्य बने सुरेश खन्ना की जानिए खासियत
नौवीं बार जीती विधायकी, लगातार दूसरी बार कैबिनेट मंत्री बने सुरेश खन्ना
योगी सरकार में मंत्री रहे सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने शाहजहांपुर (shahjahanpur) विधानसभा सीट पर जीत कर इतिहास रच दिया है। यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election Results 2022) के साथ ही शाहजहांपुर सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट से लगातार 1989 से सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) विधायक बनते चले आ रहे हैं। सरेश खन्ना ने यहां से लगातार 9वीं बार जीत दर्ज की है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के तनवीर खान (Tanveer khan) को 9,313 मतों से करारी शिकस्त दी। सुरेश कुमार खन्ना ( Suresh Kumar Khanna ) भारतीय जनता पार्टी के एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने शाहजहाँपुर शहर से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव 1989 से 2022 तक लगातार 9 बार जीता। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें सन् 2004 में शाहजहाँपुर जिले से लोक सभा का चुनाव लड़ाया जिसमें उन्हें केवल 16.34% मत प्राप्त हुए। शाहजहाँपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सन् 2004 में सांसद का चुनाव वह कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद से हार गए थे। चुनाव हारने के बाद उन्होंने विधायक के रूप में ही राजनीति में रहना पसन्द किया। सुरेश खन्ना ने 1969 में छात्र संगठन से राजनीति की शुरूआत की थी।
सुरेश कुमार खन्ना छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने सन् 1980 में शाहजहाँपुर की नगर विधान सभा का चुनाव लोक दल के प्रत्याशी के रूप में लड़ा था किन्तु जीत हासिल नहीं कर पाए।1985 में वह बीजेपी से पहला विधान सभा चुनाव लड़े और हार गए थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 1989 में भाजपा के टिकट पर उसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज़ की।इस जीत के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ता ही गया और 1991 के चुनाव में वे फिर से विधायक चुने गये और राज्य मन्त्री बने। 1993, 1996, 2002 में भी उन्होंने चुनाव जीता और सरकार में मन्त्री बने। 2007,2012,2017,2022 में 9वीं बार के विधान सभा चुनाव में भी सुरेश खन्ना का विजय रथ कोई भी पार्टी रोक नहीं सकी। सुरेश खन्ना का जन्म 6 मई 1953 में शाहजहाँपुर शहर के मोहल्ला दीवान जोगराज में हुआ था।इनकी माता श्रीमती कान्ति देवी और पिता श्री रामनारायण खन्ना थे। उन्होंने स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से एल एल बी किया। शाहजहांपुर में उन्होंने वकालत भी करी वह स्कूटर से कचहरी जाया करते थे। वे अविवाहित हैं और हनुमान जी की अब बहुत ही बड़े भक्त हैं। बिसरात रोड पर हनुमत धाम का निर्माण तथा हनुमान जी की 104 फिट ऊंची मूर्ति का लगना सुरेश खन्ना के प्रयास और मेहनत का ही फल है। खन्ना जी दीवान जोगराज, शाहजहाँपुर स्थित पैतृक निवास में अपने भाई के परिवार के साथ रहते हैं। वे स्वयं को पूर्णकालिक राजनैतिक कार्यकर्ता ही मानते हैं।
शाहजहांपुर विधानसभा में पहला चुनाव 1952 में हुआ था। तब अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के स्वामी वेदानंद नाथ विधायक बने। 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी अशफाक अली जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1962 में पहली बार कांग्रेस ने अपना खाता खोला और रफी खान चुनाव जीते। 1967 में भी कांग्रेस के एमआर खान ने जीत दर्ज की। 1969 सें जन संघ के उमाशंकर शुक्ला विधायक बने। 1974 में रफी खान एनसीओ के टिकट पर जीते। फिर 1977 में भी रफी खान विधायक बने, लेकिन जनता पार्टी के टिकट पर। 1980 में दोबारा कांग्रेस के नवाब सादिक अली खान ने परचम लहराया। 1981 के उपचुनाव के साथ नवाब सिकंदर अली ने 1985 के चुनाव में भी जीत दर्ज की। इसी चुनाव में सुरेश खन्ना बीजेपी के टिकट पर चुनाव हार गए थे।
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सुरेश कुमार खन्ना की अच्छी पकड़ है। शाहजहाँपुर की जनता में भी वह काफी लोकप्रिय हैं। सभी जाति धर्म का वोट उनको हमेशा से मिलता आया है। अगर जाति की बात करें तो उनकी खत्री बिरादरी अन्य जातियों के मामले में ना के बराबर है। सुरेश कुमार खन्ना की जीत का सबसे बड़ा कारण उनकी इमानदारी, कर्मठता क्रियाशीलता, व्यवहारिकता है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब कोई उनसे मिलने जाता है तो वह नाश्ता उसको अपने हाथ से उठाकर खिलाते हैं और बहुत ही सम्मान देते हैं। इसी का नतीजा है कि वह लगातार 9वीं बार एक ही पार्टी और एक ही विधानसभा शाहजहाँपुर से नगर विधायक हैं और पांचवी बार भाजपा सरकार में अबकी कैबिनेट मंत्री वित्त एवं संसदीय कार्य बनाए गए हैं।
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