होम डिजिटल फ्रॉड पर बड़ी राहत की तैयारी, अब धोखाधड़ी होने पर मिल सकता है मुआवजा, RBI ने रखा नया प्रस्ताव
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों को राहत देने के लिए Reserve Bank of India ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है।
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों को राहत देने के लिए Reserve Bank of India ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है।
इस प्रस्ताव के तहत छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड का शिकार होने वाले ग्राहकों को मुआवजा देने की व्यवस्था की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन लेनदेन के दौरान होने वाले नुकसान से ग्राहकों को कुछ हद तक आर्थिक सुरक्षा देना है।
आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार, डिजिटल धोखाधड़ी से पीड़ित व्यक्ति को हुए नुकसान का अधिकतम 85 फीसदी तक मुआवजा दिया जा सकता है। हालांकि इसके लिए 25,000 रुपये की अधिकतम सीमा तय की गई है।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति को यह मुआवजा केवल एक बार ही मिलेगा। यानी अगर कोई व्यक्ति बार-बार डिजिटल फ्रॉड का शिकार होता है तो उसे हर बार इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
Reserve Bank of India ने 6 मार्च को इस संबंध में एक ड्राफ्ट संशोधन जारी किया है। इसमें कम राशि वाले डिजिटल फ्रॉड के मामलों में मुआवजा देने का प्रस्ताव शामिल है।
दरअसल, आरबीआई इस समय डिजिटल ट्रांजेक्शन में ग्राहकों की जिम्मेदारी से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा कर रहा है। इस विषय का जिक्र केंद्रीय बैंक के गवर्नर Sanjay Malhotra ने 6 फरवरी को मौद्रिक नीति पेश करते समय भी किया था।
प्रस्ताव के अनुसार नए नियम 1 जुलाई 2026 या उसके बाद किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू हो सकते हैं। फिलहाल इसे ड्राफ्ट के रूप में जारी किया गया है और इस पर आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक लोग 6 अप्रैल 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं।
प्रस्ताव के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को हुआ नुकसान 29,412 रुपये से कम है और 85 फीसदी के हिसाब से मुआवजा तय होता है, तो उसमें से 65 फीसदी रकम Reserve Bank of India वहन करेगा। वहीं 10-10 फीसदी की जिम्मेदारी ग्राहक के बैंक और लाभार्थी बैंक पर होगी।
अगर कुल नुकसान 29,412 रुपये से लेकर 50,000 रुपये के बीच होता है, तो ऐसे मामलों में मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये तय की गई है। इस स्थिति में आरबीआई की ओर से 19,118 रुपये तक का योगदान किया जा सकता है।
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