होम बंगाल शपथ ग्रहण में दिखा भावुक पल, PM मोदी ने 97 साल के बुजुर्ग कार्यकर्ता के छुए पैर, बेटे ने सुनाई संघर्ष की कहानी
पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वरिष्ठ और सबसे बुजुर्ग कार्यकर्ताओं में शामिल माखनलाल सरकार के पैर छुए और उन्हें गले लगाया।
पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वरिष्ठ और सबसे बुजुर्ग कार्यकर्ताओं में शामिल माखनलाल सरकार के पैर छुए और उन्हें गले लगाया। इस पल ने समारोह में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। अब इस घटना पर माखनलाल सरकार के परिवार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
माखनलाल सरकार के परिवार ने प्रधानमंत्री मोदी के इस सम्मान को उनके लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक योगदान की पहचान बताया है। परिवार के अनुसार, उन्होंने पूरी जिंदगी राष्ट्रवादी विचारधारा और पार्टी संगठन के लिए समर्पित होकर काम किया।
माखनलाल सरकार की बहू मीनू सरकार ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक दिन है. पार्टी के लिए मेरे ससुर के सालों के समर्पण के बाद पीएम ने उन्हें सम्मानित किया. इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. यह बेहद ही खुशी का दिन है. मेरे ससुर ने दशकों तक सेवा की. मैंने उनके बलिदानों को देखा है.”
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने माखनलाल सरकार को सम्मानित भी किया, जिसे परिवार ने गर्व का क्षण बताया।
माखनलाल सरकार के बड़े बेटे माणिक सरकार ने अपने पिता के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्हें राष्ट्रगान गाने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में आरएसएस पर प्रतिबंध लगा हुआ था और राष्ट्रवादी गतिविधियों को लेकर काफी सख्ती थी।
माणिक सरकार ने कहा, “बहुत अच्छा लगा रहा है. मुझे गर्व है कि मेरे पिता को प्रधानमंत्री ने सम्मानित किया है. उन्होंने पार्टी के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ काम किया था. मैं उनसे बहुत प्यार करता था और उनका समर्पण देखा था. उन्हें एक बार राष्ट्रगान गाने के लिए गिरफ्तार किया गया था, उस समय जब जागरूकता बहुत कम थी और RSS पर प्रतिबंध लगा हुआ था. आज, 97 साल की उम्र में, वह एक सादा जीवन जी रहे हैं.”
माखनलाल सरकार आजादी के बाद भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी नेताओं में माने जाते हैं। वर्ष 1952 में कश्मीर आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ भारतीय तिरंगा फहराने के अभियान में शामिल थे।
भाजपा के गठन के बाद भी उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 1980 में पार्टी बनने के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठनात्मक समन्वयक बनाया गया। बताया जाता है कि उन्होंने एक साल के भीतर करीब 10 हजार लोगों को भाजपा से जोड़ने में मदद की थी।
इसके बाद 1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया। उस दौर में किसी नेता का इतने लंबे समय तक एक ही संगठनात्मक पद पर बने रहना बड़ी उपलब्धि माना जाता था।
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