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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team May 8, 2026 05:51 PM

UP में अफसरों के लिए नया फरमान, अब सांसद-विधायकों को नहीं दिया सम्मान तो होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए नया शासनादेश जारी करते हुए सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि जनप्रतिनिधियों के साथ शिष्टाचार में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

UP में अफसरों के लिए नया फरमान, अब सांसद-विधायकों को नहीं दिया सम्मान तो होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए नया शासनादेश जारी करते हुए सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि जनप्रतिनिधियों के साथ शिष्टाचार में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अफसरों को सीट से उठकर करना होगा स्वागत

मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी शासनादेश में निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई सांसद या विधायक किसी अधिकारी के कार्यालय में पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारी को अपनी सीट से उठकर उनका अभिवादन करना होगा और सम्मानपूर्वक स्वागत करना होगा।

आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के प्रति तय प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का पालन करना अनिवार्य होगा।

फोन कॉल का जवाब देना भी जरूरी

सरकार ने अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के फोन कॉल को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। शासनादेश के मुताबिक यदि किसी जनप्रतिनिधि का फोन आता है, तो अधिकारी को उसका जवाब देना अनिवार्य होगा।

अगर किसी वजह से अधिकारी उस समय व्यस्त हैं, तो बाद में उन्हें वापस कॉल करना होगा। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजी गई शिकायतों और मामलों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कर इसकी जानकारी भी देना जरूरी होगा।

आदेश नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

योगी सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है, तो उसके खिलाफ यूपी राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अपने आदेश में पहले जारी किए गए 15 निर्देशों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई अधिकारी सांसदों और विधायकों के फोन नहीं उठाते हैं और उनके मामलों को गंभीरता से नहीं लेते।

यह मुद्दा विधानसभा और अन्य मंचों पर भी उठाया गया था। शासन ने इसे गंभीर मानते हुए अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई है।

आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था, जो बेहद खेदजनक स्थिति है। इसी वजह से अब नए सिरे से सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ेगी जवाबदेही

सरकार का मानना है कि जनप्रतिनिधि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अधिकारियों तक पहुंचते हैं, इसलिए उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार और त्वरित संवाद प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा होना चाहिए।

अब देखना होगा कि नए शासनादेश के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव देखने को मिलता है और जनप्रतिनिधियों की शिकायतें कितनी कम होती हैं।

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