होम मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 80 साल की महिला से 1.08 करोड़ रुपये की ठगी, IPS अधिकारी बनकर लगाया चूना

समाचारदेशअपराध Alert Star Digital Team Nov 23, 2025 05:11 PM

मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 80 साल की महिला से 1.08 करोड़ रुपये की ठगी, IPS अधिकारी बनकर लगाया चूना

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक सनसनीखेज साइबर अपराध का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने 80 साल की एक वरिष्ठ महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.08 करोड़ रुपये से ठग लिया।

मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 80 साल की महिला से 1.08 करोड़ रुपये की ठगी, IPS अधिकारी बनकर लगाया चूना

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक सनसनीखेज साइबर अपराध का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने 80 साल की एक वरिष्ठ महिला को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 1.08 करोड़ रुपये से ठग लिया। ठगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला बताते हुए महिला को जाल में फंसाया और उनसे कई खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।

कैसे हुई करोड़ों की धोखाधड़ी?

शुरुआत: पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि उन्हें 27 अक्टूबर को 'विजय खन्ना' नामक अधिकारी का कॉल आया, जिसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल एक मनी-लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है और उनका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा।

IPS बनकर जाल: घबराई महिला की कॉल एक दूसरी महिला को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने खुद को आईपीएस रश्मि शुक्ला बताया। इसके बाद ठगों ने उन्हें बताया कि वह अब 'डिजिटल अरेस्ट' में हैं और जांच में सहयोग करना होगा।

दबाव और वारंट: पीड़ित को एक फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा गया और लगातार यह धमकी दी गई कि अगर वे सहयोग नहीं करेंगी, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ट्रांसफर: लगातार चल रहे मानसिक दबाव और धमकियों के चलते पीड़ित ने ₹1.08 करोड़ की बड़ी रकम अलग-अलग खातों में भेज दी।

जांच और फ्रीजिंग

कुछ दिनों बाद जब बैंक अकाउंट खाली हो गए और कॉल्स आना बंद हो गईं, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। सेंट्रल साइबर सेल ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू की।

फ्रीज की गई राशि: जांच में पता चला कि बड़ी राशि नागपुर के हितेश महुस्कर नामक व्यक्ति के बैंक खाते में भेजी गई थी। पुलिस ने उसके खाते से ₹35 लाख की धोखाधड़ी वाली राशि फ्रीज कर ली है।

FIR: आरोपी के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता)IT एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

साइबर सेल का जरूरी अलर्ट

पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी फोन पर न तो गिरफ्तारी कर सकता है और न ही पैसे मांग सकता है। साइबर सेल ने सलाह दी है कि फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाएं।

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