होम SIR पर खरगे का बड़ा खुलासा! 13 राज्यों के आंकड़े जारी कर BJP और चुनाव आयोग पर लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 13 राज्यों से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए और इसे वोट चोरी से जोड़कर देखा। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की रैली को दबाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि इंडिया गठबंधन हर नागरिक के वोट और संविधान की रक्षा के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा।
मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक समेत 13 राज्यों में SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा।
खरगे ने कहा, 'जैसे-जैसे चुनाव आयोग के कारनामे सामने आ रहे हैं और वोट चोरी का पर्दाफाश हो रहा है, मोदी-शाह जन-आंदोलन को दबाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं! वे CEC ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रहे हैं. ध्यान भटकाने की ये चालें और झूठा प्रचार केवल मोदी सरकार की साख गिरा रहे हैं और हमारे लोकतंत्र को बदनाम कर रहे हैं.'
कांग्रेस अध्यक्ष ने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों की जांच और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़े और आरोप राजनीतिक दावों के रूप में सामने आए हैं।
उत्तर प्रदेश: खरगे के साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पीलीभीत में फॉर्म-8 में अनियमित बदलावों से जुड़े 10,470 मामलों के बाद एफआईआर दर्ज की गई और राज्यव्यापी ऑडिट शुरू हुआ। इसके अलावा, 158 एमएलसी (MLC) मतदाता सूची प्रविष्टियों में सॉफ्टवेयर से जुड़ी नामों की गलतियां होने का दावा किया गया।
महाराष्ट्र: राज्य में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.07 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया गया। इसके अलावा, एमएलसी सूचियों में कंप्यूटर और ऑटोमैटिक ट्रांसलेशन के कारण गलतियां सामने आने की बात कही गई।
पश्चिम बंगाल: खरगे की ओर से साझा जानकारी में दावा किया गया कि विधानसभा चुनावों के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की ओर से दायर अपीलों में से 93 प्रतिशत अपीलें सफल रहीं।
As more skeletons tumble out of the Election Commission’s cupboard, exposing Vote Chori, Modi-Shah are trying hard to suppress the people's movement! Why are they protecting CEC Gyanesh Kumar? This diversionary tactics and bogus propaganda is only discrediting Modi Govt, and tarnishing our Democracy! INDIA shall continue our democratic struggle to protect every citizen’s vote and our Constitution! #ChaloDilli
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 27, 2026
राजस्थान: भारतीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों के बीच लगभग 30 लाख विसंगतियां होने का दावा किया गया।
गुजरात: SIR के बाद मतदाता सूची में 68.12 लाख नाम कम होने की बात कही गई। इसके बाद मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने का उल्लेख किया गया।
कर्नाटक: खरगे द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चुनाव अधिकारियों ने 61,059 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे। इस पर सवाल उठाए गए, क्योंकि आम तौर पर यह फॉर्म किसी मतदाता का नाम हटाने के अनुरोध के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
आंध्र प्रदेश: यहां 20,959 फॉर्म-7 आवेदनों में चुनाव अधिकारियों को ही आपत्ति दर्ज कराने वाले के रूप में नामित किए जाने का दावा किया गया।
ओडिशा: धामनगर में 3,000 से अधिक नाम हटाने के आवेदन आने की बात कही गई। साथ ही, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की ओर से इन आवेदनों के दुरुपयोग का आरोप लगाए जाने का उल्लेख किया गया।
तेलंगाना: साझा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 73.39 लाख नाम हटाए गए।
झारखंड: चतरा विधानसभा क्षेत्र में 4,790 फॉर्म-7 आवेदन प्राप्त होने का दावा किया गया। यह संख्या राज्य में मिले कुल आवेदनों का लगभग 36 प्रतिशत बताई गई।
हरियाणा: राज्य में 44.91 लाख सत्यापन नोटिस जारी किए जाने और 1 अक्टूबर तक 4.35 लाख सुनवाइयां लंबित होने की जानकारी साझा की गई।
दिल्ली: ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47.5 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया गया। इसके अलावा, मीडिया जांच के बाद फॉर्म-6 के निपटारे से जुड़े आंकड़ों में संशोधन किए जाने की बात कही गई।
गोवा: खरगे की ओर से साझा आंकड़ों में दावा किया गया कि ECINet में रोलबैक सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण 97 पात्र मतदाताओं के नाम शुरुआत में बहाल नहीं किए जा सके।
मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 राज्यों के आंकड़ों के जरिए विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाने वाले विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है।
खरगे ने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन नागरिकों के मतदान के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा। वहीं, उनके आरोपों और साझा आंकड़ों पर चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।
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