होम मऊ में गजब का कांड! AI से चिता पर लेटे शव की तस्वीर बनवाई, बकरे का अंतिम संस्कार कर खुद को मृत दिखाया, डेढ़ साल बाद गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के मऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां हत्या के एक आरोपी ने सजा से बचने के लिए अपनी मौत की झूठी कहानी रचने का कथित तौर पर पूरा इंतजाम कर लिया।
उत्तर प्रदेश के मऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां हत्या के एक आरोपी ने सजा से बचने के लिए अपनी मौत की झूठी कहानी रचने का कथित तौर पर पूरा इंतजाम कर लिया। आरोप है कि उसने AI की मदद से चिता पर लेटे शव की तस्वीर तैयार कराई, बकरे का अंतिम संस्कार कर उसका वीडियो बनवाया और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया। इसके बाद उसने खुद को मृत साबित करने की कोशिश की और फरार हो गया। हालांकि, रविवार को मऊ पुलिस और एसओजी की टीम ने सर्विलांस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजू उर्फ राजकुमार राजभर (38) के रूप में हुई है। वह कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के ख्वाजा जहांपुर का निवासी है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2016 में मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद मृतक के भतीजे अविनाश सिंह की तहरीर पर राजू उर्फ राजकुमार राजभर और उसके दोस्त सुदर्शन राजभर के खिलाफ कोतवाली नगर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया गया था और अदालत में सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि मुकदमे के ट्रायल के दौरान राजू ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक रचने की योजना बनाई और खुद को मृत दिखाने के लिए फिल्मी अंदाज में साजिश को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 30 मई 2025 को गाजीपुर में खुद को मृत दिखाने की कथित साजिश रची। इसके तहत श्मशान घाट पर चिता पर लेटे शव की AI से तस्वीर तैयार कराई गई। आरोप है कि अपनी मौत की कहानी को असली दिखाने के लिए शव यात्रा और अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें भी बनवाई गईं। इसके अलावा मृत्यु और दाह संस्कार से संबंधित प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए।
बताया गया है कि आरोपी ने बकरे का अंतिम संस्कार कर उसका वीडियो भी बनवाया, ताकि अपनी मौत की कहानी को विश्वसनीय बनाया जा सके। पुलिस का आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर नगर पालिका मऊ से भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा लिया गया। इसके बाद आरोपी ने संबंधित दस्तावेज अदालत में दाखिल कर खुद को मृत साबित करने की कोशिश की और फरार हो गया।
हालांकि, पुलिस की जांच में कथित साजिश का खुलासा हो गया। सर्विलांस की मदद से आरोपी का पता लगाया गया और रविवार को मऊ पुलिस तथा एसओजी की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के अनुसार, आरोपी इंटरमीडिएट की परीक्षा पास नहीं कर सका था और शेयर बाजार में ट्रेडिंग का काम करता था। पुलिस के मुताबिक, उसने कई शहरों के प्रतिष्ठित लोगों से रुपये लेकर शेयर बाजार में निवेश किए थे।
आरोप है कि कानूनी कार्रवाई से बचने और लोगों से लिए गए रुपये वापस नहीं करने के इरादे से उसने अपनी मौत की झूठी कहानी तैयार की। पुलिस अब इस मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
पुलिस के अनुसार, खुद को मृत दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के मामले में कोतवाली नगर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 294/2026 दर्ज किया गया है। इस केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 229, 233, 336(3), 337, 338 और 340(2) के तहत अभियोग पंजीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस ने मामले में आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्या के पुराने मुकदमे में सुनवाई के दौरान खुद को मृत दिखाने की कथित साजिश और AI से तस्वीर तैयार कराने का यह मामला अब चर्चा में है।
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