होम Iran के बाद अब Trump से मुलाकात! इराक की कूटनीति पर उठे सवाल, दोस्त किसका और साथ किसका?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच इराक की हालिया कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बन गई हैं। एक ओर इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए, वहीं कुछ ही समय बाद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच इराक की हालिया कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बन गई हैं। एक ओर इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए, वहीं कुछ ही समय बाद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस घटनाक्रम के बाद इराक की विदेश नीति और दोनों देशों के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ लाया गया था। नजफ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आयोजित आधिकारिक समारोह में प्रधानमंत्री अली अल-जैदी सहित इराकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और धार्मिक नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
हालांकि, इसके कुछ समय बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अली अल-जैदी से मुलाकात के बाद उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि अल-जैदी ने कम समय में इराक की दिशा बदलने का काम किया है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इराक में सत्ता परिवर्तन के दौरान उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने अल-जैदी को एक मजबूत नेता बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के संकेत दिए।
मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि इराक के पास विशाल तेल भंडार और मजबूत आर्थिक संभावनाएं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और इराक के बीच जल्द ही तेल निवेश और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बड़े समझौतों की घोषणा हो सकती है।
उनके मुताबिक, ऊर्जा क्षेत्र में होने वाली संभावित साझेदारियां दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक समझौतों में शामिल हो सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच इराक की यह सक्रिय कूटनीति क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के साथ इराक के संपर्क को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे के ठिकानों पर कार्रवाई के दावे करते रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है।
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