होम तेल खरीद पर अमेरिका को भारत का जवाब, रूस ने कहा- ‘मोदी जी की नीति काबिले-तारीफ’

समाचारदेशविदेश Alert Star Digital Team Sep 28, 2025 08:08 PM

तेल खरीद पर अमेरिका को भारत का जवाब, रूस ने कहा- ‘मोदी जी की नीति काबिले-तारीफ’

India Russia Relations | US Pressure on Oil Imports: अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है कि देश रूस से तेल आयात (Oil Imports from Russia) कम करें, लेकिन भारत ने इस दबाव को दरकिनार कर अपनी स्वतंत्र नीति जारी रखी है।

तेल खरीद पर अमेरिका को भारत का जवाब, रूस ने कहा- ‘मोदी जी की नीति काबिले-तारीफ’

India Russia Relations | US Pressure on Oil Imports: अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है कि देश रूस से तेल आयात (Oil Imports from Russia) कम करें, लेकिन भारत ने इस दबाव को दरकिनार कर अपनी स्वतंत्र नीति जारी रखी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) ने साफ कहा कि भारत की विदेश नीति और उसके राष्ट्रीय हित पूरी तरह सम्मान के योग्य हैं और किसी तीसरे देश का दबाव भारत-रूस संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा।

भारत-रूस की विशिष्ट रणनीतिक साझेदारी

लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के बीच एक ‘‘विशिष्ट रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership)’’ है। दोनों देशों के बीच लगातार उच्च-स्तरीय संपर्क बने रहते हैं। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) में पीएम मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि पुतिन दिसंबर में भारत की यात्रा कर सकते हैं।

अमेरिकी दबाव के बावजूद मजबूत रिश्ते

तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव के सवाल पर लावरोव ने कहा –
"हम भारत के राष्ट्रीय हितों और मोदी जी की विदेश नीति का सम्मान करते हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी आवश्यकताओं के अनुसार फैसले लेने में सक्षम है और रूस उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालता।

व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा

भारत और रूस के बीच सहयोग केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसमें व्यापार, रक्षा, तकनीकी सहयोग, वित्त, स्वास्थ्य सेवाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। लावरोव ने बताया कि SCO और BRICS जैसे मंचों पर भी भारत-रूस का करीबी तालमेल दिखता है।

जयशंकर-लावरोव मुलाकात

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने India Russia Relations और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसकी अध्यक्षता भारत ने भविष्य के BRICS Chair (2026) के रूप में की।

भारत की तेल नीति पर रूस का समर्थन

तेल आयात के मुद्दे पर लावरोव ने कहा कि उन्हें भारतीय साझेदारों से पूछने की जरूरत ही नहीं कि वे किससे कितना तेल खरीदते हैं। उन्होंने जयशंकर के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि –
"अगर अमेरिका भारत को तेल बेचना चाहता है तो शर्तों पर चर्चा कर सकता है, लेकिन भारत किस देश से कितना तेल खरीदेगा, यह उसका खुद का फैसला है।"
लावरोव ने इसे ‘‘सराहनीय प्रतिक्रिया (Admirable Response)’’ बताया और कहा कि यह भारत के ‘‘आत्मसम्मान (Self-Respect)’’ को दर्शाता है।

आर्थिक साझेदारी पर भरोसा

रूसी विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत और रूस की Economic Partnership पूरी तरह सुरक्षित है। यह संबंध गहरे विश्वास और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं, जिन्हें किसी भी बाहरी दबाव से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

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