होम भारत-म्यांमार सीमा पर ज़मीन की अदला-बदली की चर्चाओं के बीच क्या है पूरा मामला और क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

समाचारदेश Alert Star Digital Team Aug 6, 2026 05:20 PM

भारत-म्यांमार सीमा पर ज़मीन की अदला-बदली की चर्चाओं के बीच क्या है पूरा मामला और क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगी सीमा के कुछ अनिर्धारित हिस्सों को लेकर ज़मीन की अदला-बदली की अटकलें तेज़ हो गई हैं। हालांकि, भारत सरकार ने ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

भारत-म्यांमार सीमा पर ज़मीन की अदला-बदली की चर्चाओं के बीच क्या है पूरा मामला और क्या हो सकती हैं चुनौतियां?

भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगी सीमा के कुछ अनिर्धारित हिस्सों को लेकर ज़मीन की अदला-बदली की अटकलें तेज़ हो गई हैं। हालांकि, भारत सरकार ने ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विदेश मंत्रालय ने केवल इतना कहा है कि सीमा के कुछ हिस्सों का सीमांकन अभी बाकी है और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनका निर्धारण अभी शेष है और उन पर दोनों देशों के बीच चर्चा चल रही है। हालांकि, उन्होंने भूमि विनिमय संबंधी खबरों की पुष्टि नहीं की।

कितनी सीमा अब भी अनिर्धारित है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत-म्यांमार सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा-स्तंभों (Boundary Pillars) के माध्यम से किया जा चुका है। वहीं करीब 171 किलोमीटर सीमा अब भी अनिर्धारित है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की कबाव घाटी से जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

अमेरिकी मैगज़ीन The Diplomat की 17 जुलाई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव में लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र के आदान-प्रदान का विकल्प शामिल बताया गया है। इन दोनों सीमा-स्तंभों के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है।

क्या है प्रस्तावित योजना?

रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर के चंदेल जिले और म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र स्थित कबाव वैली से लगे करीब 2.8 किलोमीटर लंबे अनिर्धारित सीमा क्षेत्र का स्थायी समाधान निकालने के लिए भूमि विनिमय का विकल्प विचाराधीन बताया गया है। हालांकि, इस संबंध में भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या पहले भी भारत ने ज़मीन की अदला-बदली की है?

भारत के लिए यह पहली बार नहीं होगा। वर्ष 2015 में भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौते (Land Boundary Agreement) के तहत दोनों देशों ने एन्क्लेवों का आदान-प्रदान किया था। उस समझौते से करीब 41 वर्षों से लंबित सीमा विवाद का समाधान हुआ था।

भारत इस विकल्प पर क्यों कर सकता है विचार?

वर्ष 2024 में भारत सरकार ने 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की थी। इसके साथ ही सीमा पर लागू फ्री मूवमेंट रिजीम (Free Movement Regime) को समाप्त करने का भी फैसला लिया गया।

यह व्यवस्था वर्ष 2018 से लागू थी, जिसके तहत सीमा से जुड़े आदिवासी समुदायों को बिना वीज़ा के बॉर्डर पास के आधार पर 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

मौजूदा भारत-म्यांमार सीमा वर्ष 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत निर्धारित हुई थी, लेकिन कुछ हिस्सों का सीमांकन अब भी शेष है। सरकार पहले भी संसद में स्पष्ट कर चुकी है कि इन लंबित हिस्सों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र (Bilateral Boundary Mechanism) के माध्यम से किया जाएगा।

कौन से इलाके सबसे अधिक संवेदनशील हैं?

मणिपुर में बॉर्डर पिलर 64 से 68 के बीच मोल्चम सेक्टर, पिलर 75 से 79 के बीच मोरेह सेक्टर और पिलर 88 से 95 के बीच चोरो खुनौ सेक्टर को सबसे संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में माना जाता है। भारत का लगातार यही रुख रहा है कि म्यांमार के साथ कोई बड़ा सीमा विवाद नहीं है और केवल कुछ सीमा-स्तंभों का सीमांकन शेष है।

अगर भूमि विनिमय हुआ तो मणिपुर में क्या हो सकती है प्रतिक्रिया?

यदि भविष्य में भारत और म्यांमार के बीच भूमि विनिमय या अंतिम सीमा निर्धारण को लेकर कोई समझौता होता है, तो मणिपुर में इसकी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, फिलहाल यह केवल संभावित परिस्थितियां हैं क्योंकि सरकार ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है।

मैतेई संगठनों का विरोध संभव

COCOMI जैसे मैतेई संगठनों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि यदि मणिपुर की किसी भी भूमि को दूसरे देश को सौंपा गया तो वे इसका विरोध करेंगे। ऐसे किसी फैसले की स्थिति में इम्फाल घाटी सहित कई इलाकों में प्रदर्शन, बंद और जनआंदोलन देखने को मिल सकते हैं।

जातीय तनाव बढ़ने की आशंका

भूमि विनिमय का मुद्दा पहले से मौजूद मैतेई और कुकी समुदायों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। सीमा, सुरक्षा और ऐतिहासिक दावों को लेकर दोनों समुदायों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, जिसके चलते राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल विदेश मंत्रालय ने केवल इतना कहा है कि भारत और म्यांमार के बीच कुछ अनिर्धारित सीमा क्षेत्रों को लेकर बातचीत जारी है। भूमि विनिमय या किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Read More Articles

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)