होम SIR विवाद के बीच Election Commission का बड़ा बयान, आंतरिक टिप्पणियों और फैसलों पर ECI ने साफ किया अपना रुख
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों के बीच अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत बयान जारी किया है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों के बीच अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत बयान जारी किया है। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाला बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है।
आयोग के अनुसार, लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी सलाह और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना, कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना और चुनावी प्रक्रिया में आवश्यक सख्ती बरकरार रखना है। ECI ने स्पष्ट किया कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप होती हैं।
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— Election Commission of India (@ECISVEEP) September 23, 2026
चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी कानूनी मान्यता रखते हैं। इन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 में निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जारी किया जाता है।
आयोग के मुताबिक, किसी मसौदे को तैयार करने के दौरान सदस्यों की ओर से परिचालन संबंधी सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस तरह के विचार-विमर्श का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
ECI ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियों का सामने आना स्वाभाविक प्रक्रिया है। अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले ऐसे विचार-विमर्श निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने का अधिकार केवल तीनों चुनाव आयुक्तों तक सीमित नहीं है। आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
चुनाव आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि के दौरान सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट या टिप्पणियों को उजागर करना, जबकि इसी अवधि में लिए गए व्यापक फैसलों, मंजूरियों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।
आयोग के अनुसार, हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, विभिन्न निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। इसके अलावा देशभर में मतदाता सूची के संशोधन, जिसमें एसआईआर भी शामिल है, सहित कई चुनावी सुधार किए गए। ECI ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए ये सभी फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
भारत निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के प्रमुख चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया है। इस दौरान चुनाव से संबंधित अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
आयोग के मुताबिक, इन चुनावों और अन्य चुनावी गतिविधियों के संचालन के लिए व्यापक प्रशासनिक और परिचालन तंत्र का इस्तेमाल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आयोग की ओर से कई मंजूरियां और निर्देश भी जारी किए गए।
आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट का भी उल्लेख किया। ECI के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म को अनधिकृत छेड़छाड़, हेरफेर और अन्य प्रकार के हस्तक्षेप से बचाने के लिए सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाता है।
आयोग ने कहा कि आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण राष्ट्रीय डेटाबेस में लागू किए जाने वाले मानक साइबर सुरक्षा उपाय हैं। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने से संबंधित अपनी वैधानिक शक्तियों के अनुसार कार्य करते हैं।
भारत निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा कि लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को वह पूरी तरह समझता है और इसी जिम्मेदारी के तहत अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करता रहेगा।
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