होम पटना हाई कोर्ट के इस फैसले पर Supreme Court ने लिया संज्ञान, महिला से छेड़छाड़ को रेप की कोशिश न मानने पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर चिंता जताई है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को रेप की कोशिश का अपराध नहीं माना गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर चिंता जताई है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को रेप की कोशिश का अपराध नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा है कि मामले से जुड़े तथ्यों की विस्तार से जांच की जाएगी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां मौजूद हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, "हम आरोपी को सुने बिना हाई कोर्ट के फैसले को रद्द नहीं कर सकते." उन्होंने सुनवाई में मौजूद बिहार के एडवोकेट जनरल एस डी संजय से आरोपी तक सुप्रीम कोर्ट का नोटिस पहुंचाना सुनिश्चित करने को कहा। इसके लिए स्थानीय पुलिस की सहायता लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जिस पटना हाई कोर्ट के फैसले पर संज्ञान लिया है, वह 9 जुलाई को सुनाया गया था। पटना हाई कोर्ट के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने एक व्यक्ति की अपील स्वीकार करते हुए उसे रेप की कोशिश के आरोप से बरी कर दिया था। यह मामला वर्ष 2008 का था और बिहार के बांका जिले से संबंधित था।
मामले के अनुसार, पीड़िता अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने के लिए आरोपी के स्टूडियो गई थी। आरोप है कि आरोपी ने उसके पिता को बाहर इंतजार करने के लिए कहा और स्टूडियो का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद उसने महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर उसके साथ छेड़छाड़ की। महिला के शोर मचाने पर उसके पिता ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया।
पटना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि घटनाओं से महिला की गरिमा भंग करने का अपराध बनता है, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर रेप की कोशिश का अपराध साबित नहीं होता। कोर्ट ने कहा था कि रेप की कोशिश साबित करने के लिए ऐसी स्पष्ट गतिविधि होनी चाहिए, जिससे रेप करने की मंशा दिखाई दे।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने आरोपी को धारा 376 के तहत मिली सजा को रद्द कर दिया था और मामले को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत माना था।
सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता और एच एस फुल्का ने उठाया। उन्होंने पीठ का ध्यान इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक अन्य फैसले की ओर भी दिलाया। उस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ने, उसके पायजामे की डोरी तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश को रेप की कोशिश नहीं माना था।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया था और देशभर की अदालतों को यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान संवेदनशीलता बरतने का निर्देश दिया था। अब पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने के बाद इस मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।
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