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पवन खेड़ा को 30 हजार रुपये के मुचलके पर मिली अंतरिम जमानत, 28 फरवरी तक नहीं होगी गिरफ्तारी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अंतरिम जमानत मिल गई है। द्वारका कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर खेड़ा को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें 30 हजार रुपये के मुचलके पर अंतरिम जमानत दी है।
उन्हें आज असम पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
बता दें कि पवन खेड़ा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणी के लिए असम पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख खेड़ा को जब गिरफ्तार किया उस वक्त वह पार्टी के राष्ट्रीय महाधिवेशन में भाग लेने के लिए रायपुर जा रहे थे।
हालांकि उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि असम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को 28 फरवरी तक अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि दिल्ली में सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने पर खेड़ा को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए।
अपने अगले कदम के बारे में पूछे जाने खेड़ा ने कहा कि वे अभी रायपुर में पार्टी के 85वें अधिवेशन में शामिल होने के लिए जा रहे हैं। अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा, "प्राथमिकी और नोटिस की कॉपी दिए बिना, मुझे विमान से उतार दिया गया और असम पुलिस ने अवैध तरीके से गिरफ्तार कर लिया। मुझे न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है जिसने आज मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की।" उन्होंने कहा कि इस देश की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए मेरे नेता राहुल गांधी निडर होकर अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं, मैं उनके प्रयास को और मजबूत करूंगा।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने असम और उत्तर प्रदेश राज्यों को नोटिस जारी कर खेड़ा की उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें प्रधानमंत्री के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों को लेकर असम और उत्तर प्रदेश के लखनऊ तथा वाराणसी में उनके खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया है।
खेड़ा के खिलाफ प्रधानमंत्री के बारे में उनकी कथित टिप्पणी के लिए असम के हाफलोंग थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 153 बी (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ प्रभाव डालने वाले बयान देना, लांछन लगाना), 500 (मानहानि) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) शामिल हैं।
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