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समाचारदेशअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jan 30, 2026 07:46 PM

निर्मला सीतारमण का नौ का फेरा, 9वीं बार बजट पेश करने से पहले सामने खड़ी हैं ये 9 बड़ी मुसीबतें, मिडिल क्लास की सांसें अटकीं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इतिहास रचने जा रही हैं. वे लगातार 9वीं बार देश का आम बजट (Union Budget 2026-27) पेश करेंगी. हालांकि, यह बजट उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.

निर्मला सीतारमण का नौ का फेरा, 9वीं बार बजट पेश करने से पहले सामने खड़ी हैं ये 9 बड़ी मुसीबतें, मिडिल क्लास की सांसें अटकीं

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इतिहास रचने जा रही हैं. वे लगातार 9वीं बार देश का आम बजट (Union Budget 2026-27) पेश करेंगी. हालांकि, यह बजट उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा. भारत भले ही जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन धरातल पर हालात चुनौतीपूर्ण हैं. महंगाई, गिरता रुपया और बेरोजगारी जैसे 9 बड़े 'स्पीड ब्रेकर' सरकार की राह रोक रहे हैं.

1. रुपया और सोना-चांदी में लगी 'आग'

आम आदमी की जेब पर सबसे बड़ी मार महंगाई और करेंसी की गिरावट की है.

  • रुपया हुआ कमजोर: 29 जनवरी 2026 को डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92 रुपये पर पहुंच गया है.
  • सोना-चांदी की कीमतें: 30 जनवरी को सोना 1.71 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.95 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. भारत में हर साल होने वाली 1 करोड़ शादियों के लिए यह बड़ा झटका है.

2. रोजगार का संकट: IT सेक्टर में सन्नाटा

सफेदपोश नौकरियों (White Collar Jobs) में भारी कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों में टॉप-5 आईटी कंपनियों ने सिर्फ 17 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 17,764 थी. यह आंकड़ा रोजगार के मोर्चे पर खतरे की घंटी है.

3. अमेरिकी टैरिफ और चीन का बढ़ता दबदबा

वैश्विक व्यापार में भारत दोहरी मार झेल रहा है:

  • अमेरिका का एक्शन: रूस से सस्ता तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ (25% बेस + 25% पेनल्टी) लगा दिया है, जिससे एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है.
  • चीन से व्यापार घाटा: चीन ने भारत को 8.39 लाख करोड़ रुपये का सामान बेचा है, जिससे घरेलू उद्योगों की कमर टूट रही है और व्यापार घाटा बढ़ रहा है.

4. 'मेक इन इंडिया' की सुस्त रफ्तार

सरकार का फ्लैगशिप प्रोग्राम 'मेक इन इंडिया' उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे पा रहा है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 12.13% पर अटका हुआ है, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे 25% तक ले जाने का था.

5. विकास दर और विकसित भारत का सपना

सरकार ने 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए लगातार 8% की ग्रोथ चाहिए. लेकिन इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है, जो लक्ष्य से कम है.

6. किसान और प्रदूषण भी बड़ी चुनौती

  • खेती: अनाज उत्पादन बढ़ा है, लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार (Productivity) अब भी वैश्विक औसत से कम है.
  • प्रदूषण: देश के 44% शहर जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं. दिल्ली में साल के 365 दिनों में से केवल 79 दिन ही हवा साफ रहती है.
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