होम Bihar MLC Election 2026: पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, दीपक प्रकाश की कुर्सी पर संकट
बिहार विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि गुजरने के बाद यह साफ हो गया कि सीटों के बराबर ही उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
बिहार विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि गुजरने के बाद यह साफ हो गया कि सीटों के बराबर ही उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। इस चुनाव के नतीजों के साथ ही बिहार की राजनीति में कई नए समीकरण भी सामने आए हैं, जबकि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए कुल 10 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। सभी नामांकन पत्र वैध पाए जाने और किसी उम्मीदवार के नाम वापस न लेने के कारण सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से पवन सिंह, संजय मयूख, शीला पंडित और अनिल ठाकुर ने जीत दर्ज की। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से भारती मेहता, निशांत कुमार, ललन प्रसाद और शिवानी देवी निर्वाचित हुए। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से सुनील सिंह भी विधान परिषद पहुंच गए।
निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद सभी उम्मीदवार प्रमाण पत्र लेने के लिए विधानसभा पहुंचे।
इन 10 सीटों में से एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर जेडीयू ने ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक रहेगा।
इसके अलावा शेष नौ सीटों पर निर्वाचित सभी सदस्यों का कार्यकाल वर्ष 2032 तक होगा।
विधान परिषद की 10 सीटों के लिए जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन की जांच के दौरान सभी पर्चे सही पाए गए और किसी भी उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया।
ऐसी स्थिति में निर्वाचन प्रक्रिया के नियमों के तहत सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया और मतदान की आवश्यकता नहीं रही।
इस चुनाव में एनडीए की ओर से भाजपा और जेडीयू ने चार-चार उम्मीदवार उतारे थे। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) को एक सीट दी गई, जबकि विपक्षी आरजेडी ने भी एक उम्मीदवार मैदान में उतारा था।
सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों की संख्या पहले से तय होने के कारण चुनावी मुकाबला बनने की संभावना ही खत्म हो गई थी।
विधान परिषद चुनाव के परिणाम आने के बाद सबसे अधिक चर्चा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। वर्तमान में वह बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
नई राजनीतिक परिस्थितियों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि उनका आगे का राजनीतिक भविष्य क्या होगा और वह मंत्री पद पर कब तक बने रहेंगे। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगे उनके लिए कौन सा रास्ता चुना जाएगा और क्या उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा।
विधान परिषद चुनाव भले ही निर्विरोध रहा हो, लेकिन इसके परिणामों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर एनडीए ने अपने सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताकर संगठनात्मक मजबूती दिखाई है, वहीं दूसरी ओर दीपक प्रकाश की स्थिति को लेकर राजनीतिक अटकलें लगातार तेज हो रही हैं।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और सहयोगी दलों की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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