होम होर्मुज स्ट्रेट बंद तो भारत पर पड़ेगा बड़ा असर! तेल से महंगाई तक 4 मोर्चों पर संकट, CTI ने जताई गंभीर चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच गहराते टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाक्रम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की खबरों ने ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक जगत में हलचल पैदा कर दी है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच गहराते टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। हालिया घटनाक्रम के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की खबरों ने ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। भारत के प्रमुख व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत को तेल आपूर्ति, महंगाई, परिवहन और व्यापार के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो दुनिया को 1970 के दशक के बाद सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर कच्चे तेल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इसके प्रभावित होने से भारत, चीन और अन्य बड़े आयातक देशों के सामने कच्चे तेल की उपलब्धता की चुनौती खड़ी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा।
CTI महासचिव रमेश आहूजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग के अनुसार, भारत में मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान खुदरा महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं में पहले से ही कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
CTI का मानना है कि यदि ऊर्जा लागत में अचानक उछाल आता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो देश की महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। इससे खाद्य पदार्थों, परिवहन, निर्माण और दैनिक जरूरत की वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। होर्मुज मार्ग बाधित होने की स्थिति में पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बनेगा।
ऊर्जा लागत बढ़ने का सीधा असर कई उद्योगों पर पड़ सकता है।
भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं, जो आपातकालीन परिस्थितियों में कुछ समय तक राहत दे सकते हैं। हालांकि यदि संकट लंबा खिंचता है तो ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
इसके अलावा, समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने की स्थिति में बीमा लागत और सुरक्षा खर्च में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है। भारत के लिए महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना भी इस क्षेत्रीय अस्थिरता से प्रभावित हो सकती है।
भारत रूस समेत अन्य देशों से तेल खरीद रहा है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग की पूरी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से अतिरिक्त तेल मंगाया जा सकता है, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण परिवहन समय और लागत दोनों बढ़ जाएंगे। इससे आयात और महंगा पड़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों में से एक है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकता है।
भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखना और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक तेल बाजार की प्रतिक्रिया भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को तय करेगी।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।