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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Nov 5, 2024 09:17 PM

हर निजी संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकती सरकार, पढे़ं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

हर निजी संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकती सरकार, पढे़ं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

हर निजी संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकती सरकार, पढे़ं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निजी संपत्तियों के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार सभी निजी संपत्तियों का अधिग्रहण नहीं कर सकती है. कोर्ट ने 45 साल पुराने अपने ही फैसले को पलटते हुए यह निर्णय दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकार किसी भी निजी संपत्ति का अधिग्रहण कर सकती है.

 

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने बहुमत से यह फैसला दिया. सात जजों ने इस पर सहमति जताई, जबकि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने आंशिक सहमति व्यक्त की और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने अलग राय दी. इस प्रकार बहुमत से फैसला 8-1 रहा.

पूर्व के फैसले समाजवादी विचारधारा से प्रेरित

संविधान पीठ ने माना कि जस्टिस वी कृष्ण अय्यर का पूर्व का फैसला विशेष आर्थिक और समाजवादी विचारधारा से प्रेरित था. इस फैसले में कहा गया था कि सभी निजी स्वामित्व वाली संपत्तियों को सरकार अधिग्रहित कर सकती है. सीजेआई ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मानना गलत है कि सभी निजी संपत्तियां सामुदायिक संसाधन होंगी. जस्टिस अय्यर का फैसला विशेष आर्थिक विचारधारा पर आधारित था.

संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर कर देगा

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस न्यायालय की भूमिका आर्थिक नीतियां तय करना नहीं है, क्योंकि इसके लिए लोगों ने सरकार को वोट दिया है. यदि सभी निजी संपत्तियों को सामुदायिक संसाधन माना जाएगा, तो यह संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर कर देगा.

उन्होंने यह भी कहा कि 1990 के बाद से अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है और अब बाजार उन्मुख आर्थिक मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है. सीजेआई ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है, क्योंकि गतिशील आर्थिक नीतियों को अपनाया गया है.

समाजवादी थीम से असहमति

संविधान पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जस्टिस अय्यर का दृष्टिकोण समाजवादी थीम पर आधारित था और इससे सहमति नहीं जताई जा सकती. 1977 में कर्नाटक बनाम रंगनाथ रेड्डी मामले में जस्टिस अय्यर ने निजी संपत्तियों को सामुदायिक संसाधन बताया था. 1982 में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने जस्टिस अय्यर के फैसले से सहमति जताई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश का आर्थिक मॉडल बदल चुका है और इसमें निजी क्षेत्र का बहुत महत्व है. सरकार को निजी संपत्तियों का अधिग्रहण करने का पूर्ण अधिकार देना निवेश को निराश करेगा. संविधान पीठ ने कहा कि अगर संविधान निर्माताओं की मंशा होती तो वे इसे साफ-साफ लिखते.

बेंच की सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस फैसले से आंशिक सहमति जताई और पुराने फैसलों पर टिप्पणी को सही नहीं माना. वहीं जस्टिस सुधांशु धूलिया ने बाकी आठ जजों से अलग राय दी.

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