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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Sep 18, 2024 08:17 PM

चालू रहेगी ये सरकारी योजना, किसानों को ही नहीं आम आदमी को भी होता रहेगा फायदा

चालू रहेगी ये सरकारी योजना, किसानों को ही नहीं आम आदमी को भी होता रहेगा फायदा

चालू रहेगी ये सरकारी योजना, किसानों को ही नहीं आम आदमी को भी होता रहेगा फायदा

भारत सरकार ने अपनी एक ऐसी योजना को चालू रखने का ऐलान किया है, जो ना सिर्फ देश के अन्नदाता यानी किसानों को फायदा पहुंचाती है. बल्कि देश के आम आदमी की भी बचत करती हैं. सरकार ने इसके लिए 35,000 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर कर लिया है.

चुनावों से पहले आम आदमी और किसानों के हित को ध्यान में रखकर लिया जाने वाला ये सरकार का बड़ा फैसला है.

यहां बात हो रही है पीएम-आशा स्कीम (PM-Aasha Scheme) की, जिसे सरकार ने किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने और आम आदमी को आवश्यक वस्तुओं की कीमत में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू किया था. अब सरकार इस योजना को चालू रखेगी और इस पर 35,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी.

मंत्रिमंडल की बैठक में बड़ा फैसला

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में किसानों को उनकी उपज के लिए अच्छा मूल्य प्रदान करने और आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमत में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने वाली योजना ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम-आशा) की योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दे दी गई. सरकारी बयान में कहा गया है कि 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान इस योजना पर 2025-26 तक कुल वित्तीय व्यय 35,000 करोड़ रुपए का होगा.

पीएम-आशा में मिला दी गई ये योजनाएं

भारत सरकार ने दरअसल किसानों और आम आदमी को बेहत सेवा देने के लिए अपनी दो योजनाओं को पीएम-आशा में एकीकृत कर दिया है. सरकार ने किसानों को फसल पर दी जाने वाली मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) को पीएम-आशा में मिलाकर एक कर दिया है.

सिर्फ इतना ही नहीं, सरकार के पीएम-आशा योजना को लागू करने की वजह योजनाओं के कार्यान्वयन में अधिक प्रभावशीलता लाना है. साथ ही इस योजना में ही फसल के मूल्य पर घाटे को पाटने के लिए बनाई गई ‘मूल्य घाटा भुगतान योजना (पीओपीएस) और बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) को भी शामिल किया गया है. पीएम-आशा योजना इस तरह से डिजाइन की गई है किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) सुनिश्चित की जा सके.

इन फसलों के लिए मिलेगा एमएसपी

पीएसएस के तहत खरीद सत्र 2024-25 में शेड्यूल की गई दलहन, तिलहन और नारियल गिरी की खरीद की हिस्सेदारी, देश के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत होगी. इससे राज्यों को दाम गिरने की स्थिति में या फसल खराब होने की चिंता में तेजी से इनकी बिक्री नहीं करनी होगी,यानी पैनिक सेलिंग नहीं होगी. वहीं राज्य ऊंचे दामों पर किसानों से ज्यादा मात्रा में खरीद कर सकेंगे.

हालांकि सरकार ने साफ किया कि खरीद सत्र 2024-25 के लिए अरहर, उड़द और मसूर के मामले में यह सीमा लागू नहीं होगी क्योंकि 2024-25 सत्र के दौरान अरहर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद होगी, जैसा कि पहले तय किया गया था. केंद्र ने एमएसपी पर अधिसूचित दलहन, तिलहन और नारियल गिरी (खोपरा) की खरीद के लिए मौजूदा सरकारी गारंटी को बढ़ाकर 45,000 करोड़ रुपए कर दिया है.

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