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भारत ने की अफगानिस्तान में तेजी से बिगड़ते हालात की समीक्षा, फंसे हैं सैंकड़ों भारतीय
अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के एक दिन बाद भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों, विदेश नीति से जुड़े प्रतिष्ठानों और वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने सोमवार को वहां तेजी से बिगड़ते हालात की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक से संबंधित जानकारों ने बताया कि रविवार की रात को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां तेजी से बिगड़ते हालात के मद्देनजर सरकार की प्राथमिकता अफगानिस्तान में फंसे लगभग 200 भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाना है। इनमें भारतीय दूतावास के कर्मी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़कर चले जाने के बाद रविवार को तालिबान के लड़ाके काबुल में घुस गए। इसके साथ ही दो दशक लंबे उस अभियान का आश्चर्यजनक अंत हो गया जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों ने देश में बदलाव लाने की कोशिश की थी। तालिबान ने एक हफ्ते से भी कम समय में देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया और पश्चिमी देशों द्वारा प्रशिक्षित देश का सुरक्षा बल तालिबान को रोकने या मुकाबला करने में नाकाम साबित हुआ। बहरहाल, काबुल में अफरातफरी और भय का माहौल है और लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर कूच करने की कोशिशों के तहत सोमवार को बड़ी संख्या में काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंच गए।काबुल हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक उड़ानों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। विदेशी राजनयिकों और नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिकी सेना ने हवाई अड्डे की सुरक्षा अपने नियंत्रण में ले ली है। काबुल हवाई अड्डे पर अफरातफरी के माहौल और ङ्क्षचताजनक स्थिति के मद्देनजर वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित लाने के लिए विमान भेजने के निर्णय में देरी हो रही है। हालांकि जानकारों का कहना है कि भारत ने दो दिनों से कई सी-17 ग्लोबमास्टर सैन्य परिवहन विमान तैयार रखे हैं।
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