होम भारत के फैसले से उड़ जाएगी ड्रैगन की नींद, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दौड़ेगी टॉय ट्रेन

समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Aug 12, 2021 10:33 PM

भारत के फैसले से उड़ जाएगी ड्रैगन की नींद, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दौड़ेगी टॉय ट्रेन

भारत के फैसले से उड़ जाएगी ड्रैगन की नींद, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दौड़ेगी टॉय ट्रेन

भारत के फैसले से उड़ जाएगी ड्रैगन की नींद, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में दौड़ेगी टॉय ट्रेन

ईटानगर, 12 अगस्त: नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे अरुणाचल प्रदेश के तवांग शहर में टॉय ट्रेन का निर्माण करेगी। बता दें कि तवांग पहाड़ पर बसा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर शहर है, जहां तिब्बत के बाद दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जनरल मैनेजर अनशुल गुप्ता के साथ गुरुवार सुबह हुई बैठक में इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को अनुमति दी है।

अरुणाचल प्रदेश का तवांग शहर पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है, ऐसे में टॉय ट्रेन इसकी खूबसरूती में चार-चांद लगा सकती है। पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश का यह शहर समुद्र तल से करीब 3,048 की ऊंचाई पर है और राजधानी ईटानगर से 448 किलोमीटर दूर है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि तवांग भारत-चीन सीमा के बहुत ही नजदीक है। नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के प्रोजेक्ट के तहत यहां जो टॉय ट्रेन निर्माण का प्रस्ताव है, उसमें कम से कम तीन बोगियां होंगी और हर बोगी में 12 पैसेंजर बैठ सकेंगे।

इस परियोजना के तहत तवांग शहर और आसपास के टूरिस्ट स्पॉट के लिए ट्रेन सेवा विकसित की जाएगी, जिसमें टॉय ट्रेन के अलावा फूड सेंटर, क्राफ्ट बाजार के साथ-साथ पार्क जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। अनशुल गुप्ता ने कहा है कि राज्य सरकार की ओर से हरी झंडी मिलते ही नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे तुरंत ही जमीन पर काम शुरू कर देगा। खांडू के दफ्तर से जारी बयान के मुताबिक सीएम ने प्रस्ताव का स्वागत किया है और रेलवे के अधिकारियों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट के लिए जिला प्रशासन से समन्वय करने की सलाह दी है और कहा है कि राज्य सरकार इसमें पूरी सहायता करेगी।

जिला प्रशासन के साथ प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने के लिए नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के अधिकारियों और इंजीनियरों की एक टीम अगले हफ्ते ही तवांग का दौरा करेगी और इसका साझा सर्वे करेगी। इस प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार कितनी दिलचस्पी ले रही है, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जनरल मैनेजर ने भरोसा दिया है कि एकबार सबकुछ तय हो गया तो रेलवे 6 महीने के अंदर इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लेगा।

बता दें कि तवांग की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि 1959 में तिब्बत से निकलने के बाद मौजूदा दलाई लामा ने यहीं पर कुछ दिन बिताए थे। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए इसपर चीनी सैनिकों का दबदबा हो गया था। भारत के लिए यह शहर इसलिए रणनीतिक तौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत के इस क्षेत्र को चीन अभी भी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है; और तिब्बत उसके कब्जे में है।

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