होम मणिपुर में एशिया का ऐसा सबसे बड़ा और अनोखा मार्केट, केवल महिलाएं चलाती हैं इसें
मणिपुर में एशिया का ऐसा सबसे बड़ा और अनोखा मार्केट, केवल महिलाएं चलाती हैं इसें
टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल जीतने के बाद यकायक पूरे देश का ध्यान मणिपुर की महिलाओं पर गया है। यहां की महिलाएं हमेशा से पुरुषों से आगे रही। मणिपुर की राजधानी इंफाल में 500 सालों से महिलाएं खुद अपने बल पर एक ऐसा बाजार चला रही हैं, जिसे महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला एशिया के सबसे बड़ा मार्केट भी कहा जाता है।
इंफाल का इमा मार्केट जिसे मदर्स मार्केट भी कहते हैं, एशिया में महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला सबसे बड़ा बाजार है। यहां 5000-6000 से ज्यादा महिला दुकानदार तरह-तरह की चीजें बाजार के जरिए बेचती हैं। ये बहुत पुराना बाजार है। जिसका अपना महत्व है। इसका संचालन से लेकर सारा काम महिलाओं के जिम्मे ही है। महिलाओं का चुना गया यूनियन ही तय समय तक इसके प्रशासन संबंधी कामों को संभालता है। एक बार ये बाजार नार्थईस्ट इलाके में आए भूकंप में क्षतिग्रस्त हो चुका है लेकिन मरम्मत के बाद अब यहां फिर बहुत चहल-पहल रहती है। अगर कारोबार की बात करें तो यहां रोज लाखों का कारोबार होता है।
इंफाल का इमा मार्केट जिसे मदर्स मार्केट भी कहते हैं, एशिया में महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला सबसे बड़ा बाजार है। यहां 5000-6000 से ज्यादा महिला दुकानदार तरह-तरह की चीजें बाजार के जरिए बेचती हैं। ये बहुत पुराना बाजार है। जिसका अपना महत्व है। इसका संचालन से लेकर सारा काम महिलाओं के जिम्मे ही है। महिलाओं का चुना गया यूनियन ही तय समय तक इसके प्रशासन संबंधी कामों को संभालता है। एक बार ये बाजार नार्थईस्ट इलाके में आए भूकंप में क्षतिग्रस्त हो चुका है लेकिन मरम्मत के बाद अब यहां फिर बहुत चहल-पहल रहती है। अगर कारोबार की बात करें तो यहां रोज लाखों का कारोबार होता है।
मदर्स मार्केट को खैरबंद बाजार या नुपी कैथल भी कहते हैं। मणिपुरी में इसे इमाकैथिल मार्केट कहते हैं। कई महिलाएं तो यहां पीढ़ियों से दुकानदार कर रही हैं। यहां हर तरह के आइटम बिकते हैं, जिसमें हैंडीक्राफ्ट सामान, खिलौने कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, खाने का सामान, मसाले, सब्जियां, मीट और वो सारे सामान बिकते हैं, जो घरों में इस्तेमाल होते हैं। इस बाजार में पुरुषों की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं होती।
मदर्स मार्केट को खैरबंद बाजार या नुपी कैथल भी कहते हैं। मणिपुरी में इसे इमाकैथिल मार्केट कहते हैं। कई महिलाएं तो यहां पीढ़ियों से दुकानदार कर रही हैं। यहां हर तरह के आइटम बिकते हैं, जिसमें हैंडीक्राफ्ट सामान, खिलौने कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, खाने का सामान, मसाले, सब्जियां, मीट और वो सारे सामान बिकते हैं, जो घरों में इस्तेमाल होते हैं। इस बाजार में पुरुषों की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं होती।
पहले तो ये बाजार शेड्स में लगा करता था लेकिन फिर इंफाल म्युनिसपल कौंसिल ने यहां चार मंजिला का विशाल भवन बना दिया है, जिसमें सारा बाजार लगता है। हालांकि ये बाजार कई सौ साल पुराना है। इसका पहला जिक्र मणिपुर के गजेटियर में 1786 में महिला बाजार के रूप में हुआ था। तब भी इसके बारे में ये कहा गया था कि ये पूरा बाजार सुबह खुले में महिलाओं द्वारा लगाया जाता है।
पहले तो ये बाजार शेड्स में लगा करता था लेकिन फिर इंफाल म्युनिसपल कौंसिल ने यहां चार मंजिला का विशाल भवन बना दिया है, जिसमें सारा बाजार लगता है। हालांकि ये बाजार कई सौ साल पुराना है। इसका पहला जिक्र मणिपुर के गजेटियर में 1786 में महिला बाजार के रूप में हुआ था। तब भी इसके बारे में ये कहा गया था कि ये पूरा बाजार सुबह खुले में महिलाओं द्वारा लगाया जाता है।
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