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Alert Star Digital Team Apr 28, 2021 09:18 PM

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा कोरोना का खौफ, लॉकडाउन लगाने से क्यों डर रही है योगी सरकार?

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा कोरोना का खौफ, लॉकडाउन लगाने से क्यों डर रही है योगी सरकार?

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा कोरोना का खौफ, लॉकडाउन लगाने से क्यों डर रही है योगी सरकार?

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में उत्तर प्रदेश के हालात भी बेकाबू होते जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में लॉकडाउन लगाने से आखिर क्यों कतरा रही है? आमतौर पर न्यायपालिका अक्सर किसी कमी पर सरकारों को फटकारती हैं लेकिन इलाहबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तो आज हाथ जोड़कर सरकार से विनती की है कि वह राज्य में लॉकडाउन लगाने के बारे में गंभीरता से सोचे. हालांकि सरकार की तरफ से फिलहाल कोई भरोसा नहीं दिया गया है.

ऐसा लगता है कि यह कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका के बीच अहम के टकराव का मामला बनता जा रहा है क्योंकि इसी मुद्दे पर यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट से अपने पक्ष में यह आदेश हासिल कर चुकी है कि लॉकडाउन लगाने का अधिकार सिर्फ सरकार को है और यह न्यायपालिका के दायरे से बाहर है. चूंकि यूपी में कोरोना के मामले बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं और पिछले 24 घंटे में 30 हजार से ज्यादा केस सामने आए हैं.

 

ऐसे में सूबे का हाईकोर्ट भला तमाशबीन बनकर चुप कैसे रह सकता है. आखिर अदालत में बैठे जज भी तो इंसान ही हैं जो आम लोगों की तरह ही मौत का तांडव देख-पढ़ रहे हैं. ऐसे में हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने आज इस मामले की सुनवाई करते हुए न सिर्फ अपना मानवीय चेहरा पेश किया बल्कि परंपरा से हटकर यह भी जता दिया कि वे इस मामले में सरकार के साथ किसी भी तरह के टकराव के मूड में नहीं है.

 

जस्टिस वर्मा ने राज्य सरकार के वकील की तरफ मुखातिब होते हुए हाथ जोड़कर कहा, 'मैं फिर से अनुरोध करता हूं, अगर राज्य में हालात नियंत्रण में नहीं हैं, तो दो सप्ताह का लॉकडाउन लगाने में देर न करें.' जज ने आगे कहा कि कृपया अपने नीति निर्माताओं को इसका सुझाव दें. हमें लगता है कि चीजें नियंत्रण के बाहर हो चुकी हैं.

 

लॉकडाउन एक कारगर हथियार

 

संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जब देश के लगभग सभी राज्यों ने लॉकडाउन को एक कारगर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, ऐसे में यूपी सरकार की जिद न सिर्फ समझ से बाहर है बल्कि पूरे प्रदेश की जनता को जानबूझकर महामारी की तरफ धकेलने के अत्याचार जैसा ही है. देश का शायद ही कोई डॉक्टर या विशेषज्ञ ऐसा होगा जिसने संक्रमण पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन लगाने की वकालत न की हो.

 

हस्तक्षेप

 

सियासत से जुड़े किसी मामले में सूबे का मुखिया अगर अपनी मनमर्जी करता है, तो समझा जा सकता है लेकिन यहां तो सवाल उस महामारी से जुड़ा है जहां पर जहान को संभालने से पहले जान बचाना जरूरी है. चूंकि मामला लोगों की जिंदगी से जुड़ा है और न्यायपालिका ने तो अपना काम कर दिया. लेकिन अब देश के मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का और पार्टी प्रधान के नाते बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा का ये नैतिक दायित्व बनता है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और अपने संन्यासी मुख्यमंत्री को 'हठ' छोड़ने की सलाह देते हुए 'राजधर्म' का पालन करने की नसीहत दें. शायद उनकी नसीहत ही प्रदेश के लोगों का कुछ भला कर सके.

 

अदालत ने आज ये भी कहा कि कागजों पर सब कुछ अच्छा है लेकिन हकीकत में सुविधाओं की कमी है. इसलिए हम हाथ जोड़कर अपने विवेक का इस्तेमाल करने की अपील करते हैं. बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के बड़े शहरों लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, कानपुर नगर और गोरखपुर में लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया था लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी.

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