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शोध में बड़ा खुलासा- दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर
नई दिल्ली। नैसर्गिक खूबसूरती के लिए मशहूर उत्तराखंड में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। रौद्र हुई धौलीगंगा ने देखते-देखते चमोली शहर में तांड़व मचा दिया। 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग लापता हैं। इस हादसे ने साल 2013 में आई त्रासदी की याद दिला दी। जोशीमठ के धौली गंगा घाटी में अचानक ग्लेशियर टूटने और बादल फटने से कई लोग पानी के बहाव में बह गए हैं। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि बढ़ते तापमान के कारण 21 वीं सदी की शुरूआत में ही हिमालय के ग्लेशियर दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं। साल 2019 में प्रकाशित एक अध्यन के मुताबिक हर साल आधी बर्फ पिघल रही है जिसके चलते भारत सहित कई देशों के करोड़ों लोगों के लिए पानी की कमी का खतरा पैदा हो गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत, नेपाल, भूटान और चीन में हो रहे जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियर खत्म हो रहे हैं।
जून 2019 में जर्नल साइंस एडवांस में प्रकाशित अध्यन में सामने आया है कि साल 2000 के बाद से हर साल तेजी से बर्फ पिघल रही है। रिसर्च में ये भी बात सामने आई है कि 1975 से 2000 के मुकाबले ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार दोगुनी हुई है। अमेरिका में पीएचडी कर रहे जोशुआ मौरर ने बताया कि तस्वीर साफ है कि इस समय अंतराल में हिमालय के ग्लेशियर कितनी तेजी से पिघल क्यों रहे हैं। मौरर का कहना है कि रिसर्च में इस बात की गणन नहीं है नेकिन ग्लेशियर ने पिछले 4 दशकों में अपने विशाल द्रव्यमान के एक चौथाई हिस्से को खो सकते हैं।
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