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केंद्र सरकार की किसान संगठनों से अपील, SC की कमेटी के सामने रखें अपनी बात
नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन आज लगातार 49वें दिन जारी रहा. इस बीच सरकार ने किसान संगठनों से अपील की है कि वह सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित कमेटी के सामने पेश हों और अपनी बात रखें.
इससे पहले मंगलवार को किसान संगठनों ने साझा बयान जारी कर कहा था कि वह कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे क्योंकि कमेटी के सभी चार सदस्य नए कृषि कानूनों के हिमायती हैं. सरकार और कमेटी की नियत एक ही है. उन्होंने अपनी पुरानी मांगों को दोहराते हुए कहा था कि सरकार कृषि कानूनों को वापस ले.
बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी थी और गतिरोध को खत्म करने के ख्याल से चार सदस्यों की कमेटी गठित की. कमेटी में भारतीय किसान यूनियन नेता भूपिंदर सिंह मान, महाराष्ट्र के शेतकरी संगठन के नेता अनिल घनवटे, कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी और खाद्य नीति विशेषज्ञ प्रमोद जोशी को शामिल किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 4 सदस्यीय कमिटी 10 दिन में काम शुरू करे और इसके 2 महीने में रिपोर्ट दे. अगली सुनवाई 8 हफ्ते बाद होगी.
किसान संगठनों ने आज लोहड़ी के मौके पर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई. किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि हमने 3 क़ानूनों की प्रतियां जलाकर सरकार को संदेश दिया है कि इसी तरह ये बिल एक दिन हमारे गुस्से की भेंट चढ़ेंगे और सरकार को क़ानून वापस लेने पड़ेंगे. 18 तारीख को महिलाएं पूरे देश में बाज़ारों में, SDM दफ़्तरों, जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन करेंगी.
अगली बैठक पर सस्पेंस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच होने वाली 9वें दौर की बैठक को लेकर भी फ़िलहाल स्थिति साफ़ नहीं है. सरकार में इस बात पर मंथन चल रहा है कि प्रस्तावित बैठक करवाई जाए या नहीं. गतिरोध खत्म करने के लिए 8 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की बैठक हुई थी. यह बैठक भी बेनतीजा रही थी.
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